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Rampur Latest News: इतिहासकार नवेद केसर रजा बताते है कि इस गेट का आर्टिटेक्ट मिस्टर डब्ल्यू सी राइट, जो अवध में कभी इंजीनियर हुआ करते थे उनके द्वारा बनाया गया। नवाब हामिद अली खान के दौर में वे रामपुर आए थे। उस समय उन्हें मिनिस्टर का स्टेट्स मिला हुआ था। अस्तबल गेट इतना बड़ा है कि उसके अंदर घोड़ों के साथ-साथ पूरे स्टाफ का भी इंतजाम होता था।
रामपुर के मोहल्लों का है रोचक इतिहास
रामपुर में नवाबों के बड़ी संख्या में घोड़े पाले जाते थे और उनका अपना एक उम्दा संग्रह भी था। रामपुर के मोहल्लों का एक रोचक इतिहास है। शहर के बीचों बीच बसा अस्तबल मोहल्ला नवाब हामिद अली खां और नवाब रजा अली खां के समय में बसाया गया था।
अस्तबल में थे कीमती नस्ल के घोड़े
रामपुर नवाबों के अस्तबल में काफी कीमती नस्ल के घोड़े थे। उस समय नवाबों की सेना बड़े ही शान से चलती थी। और ये आखिरी नवाब रजा अली खान के वक्त तक मौजूद रहे। शहर के बीचों बीच बसा अस्तबल मोहल्ला नवाब हामिद अली खां और नवाब रजा अली खां के समय में बसाया गया था। जहां नवाबों के घोड़े खड़े किए जाते है। उस जगह का नाम अस्तबल मोहल्ला पड़ गया।
घोड़ों के साथ साथ पूरे स्टाफ का भी इंतजाम
इतिहासकार नवेद केसर रजा बताते है कि इस गेट का आर्टिटेक्ट मिस्टर डब्ल्यू सी राइट, जो अवध में कभी इंजीनियर हुआ करते थे उनके द्वारा बनाया गया। नवाब हामिद अली खान के दौर में वे रामपुर आए थे। उस समय उन्हें मिनिस्टर का स्टेट्स मिला हुआ था। अस्तबल गेट इतना बड़ा है कि उसके अंदर घोड़ों के साथ साथ पूरे स्टाफ का भी इंतजाम होता था।
नवाबों का राज हुआ स्थापित
बाद में जब बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान से जो भी शरणार्थी हिंदुस्तान आए। उन्हें अस्तबल में बसाया गया। तब से इस मोहल्ले का नाम अस्तबल मोहल्ला पड़ गया। आज तक वे लोग यहां रहते है। रामपुर पहले कठेर नाम का जंगल हुआ करता था और इस जंगल में कठेरिया राजपूत राजा राम सिंह का राज हुआ करता था। इसके बाद यहां नवाबों का राज स्थापित हुआ और रामपुर स्टेट के नाम से जाना जाने लगा।
Published on:
23 Feb 2024 03:23 pm
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