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अयोध्या में फिर हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सपा नेता ने संयुक्त राष्ट्र से कर दी यह बड़ी मांग

बोले-भारत के मुसलमान को कोई रास्ता भी सुझाई नहीं देता, बहुत नाउम्मीदी और मायूसी के दौर से यहां गुजर रहें हैं मुसलमान

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Azam khan

अयोध्या में फिर हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सपा नेता ने संयुक्त राष्ट्र से कर दी यह बड़ी मांग

रामपुर. बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी से पहले एक बार फिर अयोध्या में बड़ी संख्या में शिवसेना और वीएचपी के कार्यकर्ताओं के पहुंचने से जहां इलाके के मुसलमानों में खौफ का माहौल है और लोगों के अपनी सुरक्षा के लिए अयोध्या छोड़कर दूसरे स्थानों पर जाने की खबरें आ रही है। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने पत्र लिखकर इस मामले में संयुक्त राष्ट्र संघ से निगरानी करने की मांग की है। आजम खां ने कहा कि एक बार फिर अयोध्या में जिस तरह का माहौल बन रहा है। ऐसे में एक बार फिर हमारी यूएनओ से अपील है इन हालात पर वो नजर रखे और कहीं ऐसा न हो कि छह दिसम्बर 92 में जब राम-जानकी रथ चला था, उस जैसा माहौल देश में न बनें। उन्होंने कहा कि इस समय के संग्राम, महासंग्राम, संघर्ष, टकराव में मुसलमान कहीं नहीं है, क्योंकि मुसलमान अपने आप से अपनी व्यवस्था से देश के लोकतंत्र से बहुत मायूस है। इस वक्त भारत के मुसलमान को कोई रास्ता भी सुझाई नहीं देता। बहुत नाउम्मीदी और मायूसी के दौर से भारत का मुसलमान गुजर रहा है। बहुत अपमानजनक और जुल्म से भरी जिन्दगी यहां मुसलमान गुजार रहें हैं।

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इसके साथ ही कानून हाथ में लेकर राम मंदिर निर्माण की बात करने वालों के खिलाफ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के सबसे बहादुर लोग, जो छह दिसम्बर 1992 को अकेली पुरानी इमारत को गिराने में कामयाब हो गए और बहादुरी का काम हुआ। एक तरफा बहादुरी छह दिसम्बर को हुई थी। दूसरी बहादुरी फिर कर लें। दोनों बहादुरी इतिहास में लिखी जाएंगी। फौज पहले भी लगी थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह के हालात है, इसमें फौज पीएसी से मतलब नहीं होता। आदेश और हाकिम की नीयत से मतलब होता है। इसके आगे उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हाकिम खामोश तमाशाई बना हुआ है। बहुत बहादुरी की बात है। दूसरा शौर्य दिवस मनाएंगे, इसी से वोट मिलेगा।

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उन्होंने कहा कि चार पढ़े लिखे नौजवान बेरोजगारी से तंग आकर ट्रेन के आगे कूद गए, जिनमें से तीन की मौत हो गई। एक जिन्दगी मौत की लड़ाई लड़ रहा है। कोई और देश होता तो लोग सड़कों से वापिस नहीं जाते, जबतक उतना ही खून सत्ता में बैठे लोगों का नहीं बह जाता। हमारे यहां तो इतिहास में सबसे बड़ा कारनामा छह दिसम्बर को हुआ। बाकी तो बाहर से हुक्मरां आते रहे और हम पर हुकूमते करते रहे। अब हो सकता है दूसरा बड़ा बहादुरी का काम हो। उन्होंने कहा कि आज जो कुछ हो रहा है यह कोर्ट को खुली चुनौती है। उन्होंने कहा कि यह सब इस लिए हो रहा है, क्योंकि पांच साल कुछ तो किया नहीं है, इसीलिए पांच दिन में भूख से मरते बिलखते लोगों को कुछ तो दिखाना है।