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प्राचीन हाथीवाला मंदिर में भगवान पाश्र्वनाथ करते हैं मनोकामना पूरी

दर्शनीय और मनोकामना पूर्ण होती मंदिर में भक्तों की, क्षेत्रपाल महाराज की लेते धर्मालु मान्यता।

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Online Indore

Sep 18, 2015

parshwnath

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रतलाम।
राम मोहल्ला में अतिप्राचीन श्रीसंभवनाथ दिगम्बर जैन बीस पंथ बागडिय़ों का मंदिर जो (हाथीवाला मंदिर) के नाम से प्रसिद्ध है। यहां मूलनायक के रूप में पाश्र्वनाथ भगवान विराजित है। शांतिनाथ भगवान, 24 तीर्थंकर, जिनसेन भट्टारक राम स्वामी की गादी विराजित है। क्षेत्रपाल महाराज और मां पद्मावती की प्राचीन मूर्तियां श्रद्धालुओं कृपा बरसाती है। क्षेत्रपाल महाराज की तो भक्त मान्यता लेते हैं और पूरी भी होती है।


मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार डोसी ने बताया कि 5-6 साल पूर्व मूलनायक के मंदिर अनायास विजय घंट अपने आप हिलने लगे थे, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ भी उमड़ी थी। कभी-कभी आरती आराधना के समय प्रभु मूर्ति मंदिर की दीवारों से केसरिया बुंद-बुंद निकलती है, जिसके साक्षात दर्शन होते है। मंदिर में अनगिनत प्रभु विराजित है।


एतिहासिक ग्रथों का संग्रहण


डोसी ने बताया कि मंदिर में करीब 400 प्राचीन एतिहासिक ग्रंथों का संग्रहण भी है, जिसकी पुरातत्व विभाग द्वारा भी लिस्ट बनाई गई है। ग्रंथों में स्वर्ण लिखित भी और कई भाषाओं ने लिखे गए है। पर्युषण के दौरान हर दिन श्रद्धानुसार अक्षत का चौक बनाया जाता है, नित्य पूजन वंदन और प्रभु का अभिषेक किया जा रहा है।


मंदिर जीर्णोद्धार किसने कराया


संवत 1506 वैशाख सुदी 15 दिगम्बर जैनाचार्य कुन्द कुन्द भगवंत की परम्परा में काष्टासंघी भट्टारक विजय कीर्ति संघे जयसेनाचार्य के उपदेश से हुमड़ जाति के श्रेष्ष्ठी शाह सोमाभाई परिवार ने दिगम्बर जैन बागडिय़ा मंदिर निर्माण करवाया। चौबीसी जिनबिम्ब नित्य पंचामृत अभिषेक पूजार्थ प्रतिष्ठा करवाई।


संवत 1735 पौष सुदी 2 आचार्य देवनन्दी उपदेशार्थ भट्टारक क्षेम कीर्ति ने मंदिर जीर्णोद्धार कराकर संभवनाथ जिन बिम्ब स्थापित किया। संवत 1976 वैशाख सुदी 1 बागडिय़ा समाज के अतुलद्रव्य सहयोग से जीर्णोद्धार कराया। इसका प्राचीन शीलालेख आज भी मंदिर लगा हुआ है।


(फोटो- मंदिर में विराजित पाश्र्वनाथ भगवान की मूर्ति।)

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