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धनतेरस पर महालक्ष्मी को चढ़ा दिया 120 करोड़ का सोना, दूर-दूर से आते हैं भक्त

धनतेरस से खुलेंगे महालक्ष्मी मंदिर के पट भाईदूज तक, पांच दिन अपलक निहारेंगे भक्त रत्नपुरी की महालक्ष्मी के कुबेर खजाने को...।
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रतलाम

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Manish Gite

Oct 17, 2017

mahalashmi

गौरीशंकर जोधा
रतलाम। रत्नपुरी की 350 साल प्राचीन महालक्ष्मी के दरबार में आखिरकार धनतेरस की पूर्व संध्या तक 120 करोड़ से अधिक का कुबेर खजाना भक्तों ने शृंगार स्वरूप में अर्पण कर दिया। देर रात तक स्वर्ण आभूषण, हीरे-मोती जवाहरात, नोटों की गड्डियों लेकर पहुंचने वाले भक्तों का सिलसिला जारी है। साल-दर-साल प्राचीन महालक्ष्मी के शृंगार की बढ़ती भव्यता देश-प्रदेशों तक विख्यात होने लगी है।


अनुमानित 9 करोड़ से अधिक रुपए मंदिर में शृंगार लिए पहुंचे हैं तो अनगिनत सिर की बिंदिया से लेकर पैरों की बिछुड़ी तक का सम्पूर्ण शृंगार सामग्री स्वर्ण-आभूषण, हिरे-मोती-डायमंड और रत्नों जड़कर पहुंचा है।

धनतेरस की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में माता के शृंगार के दर्शनार्थ अतिथियों द्वारा सुबह ४.३० से ६ के मध्य मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे। मंदिर के संजय पुजारी के अनुसार धनतेरस पर सुबह पट खुलने के साथ ही पूजा कर आरती की जाएगी। इसके बाद शुभ मुहूर्तो में सुबह से रात तक कुबेर पोटली के खजाने के साथ ही महालक्ष्मी का पाना भी महिलाओं को वितरण किया जाएगा।

ये है इस वर्ष खास

२५ सोने के हार।

२६ जोड़ पायल।

४०८ चांदी के नोट

१५५ सोने के नोट

५७२ सोने-चांदी की कैडबरी

१५९ चांदी की सिल्लियां

२४० सोने की अंगुठी

२१२ सोने की पाटली

३३ कंदोरा-जनोई चांदी

०५ चांदी के हाथी

२०५ चेन सोने की

५ हीरे की अंगुठी

७२ सोने की कांटे

९१ कान की झुमकी

१५२ विक्टोरिया सिकके

१२२ चांदी के छत्र

२० चांदी के मुकुट

ये भी अनमोल है खास

इसके अलावा डायमंड के सेट। रत्नों में हिरा, पन्ना, पुखराज, निलम अनगिनत रत्नों से युक्त अंगुठियां है। साथ ही एक सोने की थाली, कटोरी, चम्मच का सेट के अलावा कुबेर की चांदी की मूर्ति, सोने की छतरी आदि कई स्वर्ण आभूषण मंदिर में भक्तों द्वारा माता के शृंगार के लिए पहुंचाए गए है। जिन्हे पांच दिन बाद पुन: माता के आशीर्वाद स्वरूप वैभव के रूप में भक्त ले जाएंगे।

समुद्र मंथन का दृश्य

मंदिर परिसर में समुद्र मंथन का दृश्य दर्शाया गया है, जिसपर से होकर श्रद्धालु माता के दर्शनार्थ पहुंचेंगे। पुरुष और महिला वर्ग की अलग-अलग व्यवस्थाएं दर्शन के लिए और निकासी के लिए की गई है। पानी में फव्वारे व शिव प्रतिमा भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। धनतेरस, रूपचौदस, दीपावली, पड़वी और भाईदूज तक रहेगा शृंगार। दीपावली पर डायमंड की वेषभूषा से होगा शृंगार।

कुबेर का खजाना इस समय मिलेगा

सुबह कुबेर पोटली का खजाना १०.३० से १२ बजे तक। इसके बाद दोपहर ३ से ४.३० बजे तक। शाम ७.३० से ९ बजे तक। रात १०.३० से १२ बजे तक महालक्ष्मीजी के पाने के साथ केवल महिलाओं को भेंट किया जाएगा।

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