
रतलाम। इंदौर में डीपीएस की बस से हुए हादसे में मासूमों की मौत से व्यथित होकर ख्यात साहित्यकार और चिंतक प्रो. अजहर हाशमी इस बार अपना जन्मदिन नहीं मनाएंगे। उनके ६८वें जन्मदिन पर महाविद्यालयीन विद्यार्थी परिवार की तरफ से किए जाने वाले आयोजन को भी उनके इस निर्णय से स्थगित करना पड़ गया है। प्रो. हाशमी का जन्मदिन १३ जनवरी को है और महाविद्यालयीन विद्यार्थी परिवार हर साल इसे गरिमापूर्ण तरीके से मनाता रहा है।
विद्यार्थी परिवार भी निर्णय के साथ
महाविद्यालयीन विद्यार्थी परिवार के सतीश त्रिपाठी और हेमंत भट्ट ने बताया प्रो. हाशमी से उनके जन्मदिन पर आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रम के बारे में उनसे विचार-विमर्श करने के दौरान उन्होंने जन्मदिन नहीं मनाने का निर्णय सुनाया। उनके इस निर्णय में विद्यार्थी परिवार भी पूरी तरह सहभागिता निभाते हुए जन्मदिन पर कोई आयोजन नहीं करेगा।
पहले भी निरस्त कर चुके हैं आयोजन
यह पहला मौका नहीं है जब प्रो. हाशमी अपना जन्मदिन नहीं मना रहे हैं। पूर्व में भी कई हादसों के दौरान उन्होंने उस साल अपना जन्मदिन नहीं मनाने का निर्णय किया था। वर्ष २००६ में आई सुनामी, मंदसौर में हुए गोवध, नई दिल्ली के निर्भया कांड और फिर पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के समय भी प्रो. हाशमी ने अपना जन्मदिन नहीं मनाया था।
पाठ्यक्रम में शामिल हैं कविताएं
प्रो. हाशमी की कविताओं को राज्य सरकार ने अपने पाठ्यक्रम में शामिल किया है। बेटियां पावन दुआएं कविता काफी पहले ही पाठ्यक्रम में ली जा चुकी है। हाल ही में ख्यात चिंतक और कवि प्रो. हाशमी की कविता को प्रदेश सरकार ने छटी कक्षा की वर्कबुक में पहले पन्ने के ठीक दूसरी तरफ दिया स्थान, अंतिम पृष्ट पर कविवर रवींद्र नाथ टैगोर की कविता को लिया गया है। प्रो. हाशमी की कविता को पाठ्यपुस्तक में स्थान देना अपने आप में रतलाम ही नहीं पूरे मालवा के लिए गौरव की बात है।
Published on:
10 Jan 2018 12:01 pm
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