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Indian Railway के फर्जी दस्तावेज तैयार कर फरीदाबाद के व्यापारी से 3.12 करोड़ की ठगी

नटवरलाल को भी पीछे छोड़ रहा शहर का एक गल्ला व्यापारी, 600 करोड़ की फर्जी आईटीसी के मामले में जारी है कार्रवाई

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टीकमगढ़. जिले का एक गल्ला व्यापारी फिल्मी किरदार नटवरलाल को पीछे छोड़ता दिखाई दे रहा है। वाणिज्यकर विभाग सेे फर्जी तरीके से 600 करोड़ की आईटीसी का लाभ लेने के बाद हरियाणा के एक व्यापारी से 3.12 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में व्यापारी का नाम सामने आया है। शिकायत पर देहात थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

जिले में गल्ले का कारोबार करने वाले तीन भाई मुकेश असाटी, जमना असाटी एवं विष्णु असाटी ने वाणिज्यकर विभाग के साथ ही व्यापारियों को परेशान कर रखा है। इनके द्वारा दिल्ली की बोगस फर्मों से माल खरीदी दिखाकर वाणिज्यकर विभाग से 600 करोड़ की आईटीसी का लाभ लिया गया है। हरियाणा के ओल्ड फरीदाबाद निवासी व्यापारी संजीव कुमार पाराशर ने इनके ऊपर 3.12 करोड़ की ठगी करने की शिकायत की है। देहात थाना पुलिस ने 1.21 करोड़ के लेन-देन के प्रमाण मिलने पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

रेलवे के फर्जी दस्तावेज से लगाया चूना


देहात थाना प्रभारी रवि गुप्ता ने बताया कि फरीदाबाद के व्यापारी संजीव कुमार पाराशर ने एसपी से धोखाधड़ी की शिकायत की थी। पाराशर ने बताया था कि खरगापुर निवासी जमना प्रसाद असाटी से 9 माह पूर्व फरीदाबाद में मुलाकात हुई थी। असाटी ने बताया कि वह महक ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर गल्ले का कारोबार करते हैं। इस पर उन्होंने असाटी से 6 करोड़ 33 लाख 12 हजार रुपए में 2637 टन गेहूं खरीदने का सौदा किया था। इसके एवज में उन्होंने 13 जून 2023 को जमना प्रसाद असाटी को 2 करोड़ रुपए नकद दिए थे। कुछ दिन बाद असाटी ने उन्हें रेलवे के रैक बुकिंग के ई-डिमांड और आरआर नंबर भेज कर बताया कि उनका माल टीकमगढ़ में लोड हो रहा है।

कोई माल लोड ही नहीं किया

असाटी द्वारा माल लोडिंग करते हुए वाहनों एवं रैक के फोटो भी भेजे गए थे। इस पर पाराशर ने अपने बेटे तुषार के बैंक खाते से जमना असाटी के भाई मुकेश असाटी के खाते में 1.20 करोड़ रुपए भेज दिए थे। वहीं रेलवे का भाड़ा 1 लाख रुपए भी ट्रांसफर किया था। इसके बाद उन्हें माल नहीं मिला तो असाटी से फोन पर बात की। असाटी उन्हें लगातार भ्रमित करते रहे। परेशान होकर पाराशर ने टीकमगढ़ पहुंच कर रेलवे स्टेशन से ई-डिमांड और आरआर नंबर पर भेजे गए माल की जानकारी ली तो पता चला कि यह तो फर्जी है। टीकमगढ़ से इस प्रकार का कोई माल लोड ही नहीं किया है। वहीं इन व्यापारियों से मिलने का प्रयास किया तो फोन बंद थे

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