
पूर्व सीएमओ की पीएम आवास घोटाले की फाइलों पर नजर
रतलाम/नामली। नामली नगर पंचायत में हुए प्रधानमंत्री आवास घोटाले में नित नए राज खुल रहे हैं। ताजा मामला नामली नपं सीएमओ के अधिकृत ईमेल को लेकर सामने आया है। इस मेल को कुछ दिन पहले यानि १७ दिसंबर को सतना के समीप किसी जगह लॉगिन कर इससे छेड़छाड़ की बात सामने आई है। इस बात की जानकारी मिलने के बाद नामली नपं के वर्तमान सीएमओ संदेश शर्मा ने नामली पुलिस को एक और पत्र लिखकर अनधिकृत रूप से इस ईमेल का उपयोग करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। बताया जाता है कि यह केवल ईमेल का उपयोग करने तक ही बात सीमित नहीं है वरन वर्तमान तकनीक से कहीं भी बैठा व्यक्ति कहीं दूसरी जगह के कम्प्यूटर को आपरेट कर सकता है। संभवत: यह भी हुआ है जिससे कम्प्यूटर की फाइलें गायब होने के अंदेशे से इनकार नहीं किया जा सकता है।
इस तरह कर सकते हैं दूसरी जगह उपयोग
इस समय तकनीक काफी आगे निकल चुकी है। इसलिए नामली के कम्प्यूटर का उपयोग किसी दूसरी जगह बैठा व्यक्ति टीम व्यूवर या एनीडेस्क के माध्यम से संचालित कर सकता है। माना जा रहा है कि १७ दिसंबर को नामली का कम्प्यूटर भी चला हो और जहां इसका ईमेल लागिन किया गया है वहीं से इस कम्प्यूटर को भी आपरेट करके इसकी फाइलों में छेड़छाड़ करके उन्हें नष्ट या उनमें बदला कर दिया गया हो। यह बात पूरे कम्प्यूटर सिस्टम की कम्प्यूटर इंजीनियर से बारीकी से जांच करवाने के बाद ही पता चल सकेगी।
भतीजे पर अब भी नहीं हुई कार्रवाई
नामली नपं कार्यालय बंद होने के बाद २१ नवंबर को अनधिकृत रूप से पहुंचकर तत्कालीन सीएमओ अरुण ओझा के भतीजे अभिषेक ओझा ने सीएमओ कक्ष से पीएम आवास योजना से जुड़ी फाइलों और प्रोसिडिंग रजिस्टर को ले जाने के मामले में पुलिस ने अब तक कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया है। वर्तमान सीएमओ संदेश शर्मा इसे लेकर नामली पुलिस को पत्र लिख चुकी है। फाइलें ले जाने और उसमें अफरा-तफरी करने के बाद वापस सीएमओ कार्यालय में लाकर रखने की बात खुद अभिषेक स्वीकार कर चुका है।
सीएमओ और अध्यक्ष दोनों अब तक फरार
पीएम आवास योजना के घोटाले में पिछले माह की ५ तारीख को नामली थाने में प्रकरण दर्ज होने के बाद से ही नगर पंचायत सीएमओ ओझा और अध्यक्ष नरेंद्र सोनावा फरार चल रहे हैं। ये दोनों कहां है इसे लेकर पुलिस अब तक केवल फरार होने की बात ही कह रही है। अध्यक्ष की गिरफ्तारी के लिए कई जगह तलाश करने की बात कही गई किंतु अब तक न तो अध्यक्ष ही मिल पाया है और न ही सीएमओ ओझा। सीएमओ ओझा तो सतना जिले की कोटर नगर पंचायत में कार्यरत है और वहां बकायदा सारे काम निपटा रहा है।
कोई कर्मचारी मिला हो सकता
नामली नपं में इस तरह हो रहे एक के बाद एक घटनाक्रम को लेकर वर्तमान नामली नगर परिषद में कार्यरत कर्मचारियों में से कुछ तत्कालीन सीएमओ अरुण ओझा का नजदीक रहे चुके हैं उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ रही है। उन कर्मचारियों पर भी शक की सुई घुमने लगी है। कंप्यूटर में छेड़छाड़ मामले का खुलासा होता है तो संभवत नामली में कार्यरत कुछ कर्मचारी इसके दायरे में आ सकते हैं। गौरतलब है कि तत्कालीन सीएमओ ओझा के नजदीकी कर्मचारियों में कुछ का नाम शामिल है जो यह काम कर सकते हैं।
कर्मचारी को पता चला कम्प्यूटर उपयोग
यह घटनाक्रम 17 नवंबर को शाम पांच बजे कार्यालय बंद होने के बाद का है। सारे कर्मचारी अधिकारी अपने-अपने घर चले गए थे। उसके बाद साढ़े पांच से छह के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने नामली नगर परिषद का कंप्यूटर खोलकर पीएम आवास से जुड़े अहम डाटा और महत्वपूर्ण जानकारी कंप्यूटर से चुराने के लिए कंप्यूटर से छेड़छाड़ की। इस घटनाक्रम की जानकारी 18 दिसंबर को सुबह कार्यालय खुलने के बाद किसी काम से नगर परिषद में कार्यरत इंजीनियर विनोद पाटीदार ने जब कंप्यूटर खोला तो स्क्रिन पर उक्त मैसेज दिख जिसमे सतना जिले की लोकेशन सामने आई। यह देख कर इंजीनियर विनोद ने तत्काल सीएमओ संदेश शर्मा को मामले से अवगत कराया। शर्मा ने नामली पुलिस में शिकायत की।
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बाहर ड्यूटी होने से पत्र नहीं मिला
पिछले तीन-चार दिन से बाहर ड्यूटी होने से नामली में नहीं था। आज ही लौटा हूं और इस तरह का कोई पत्र फिलहाल मुझे नहीं मिला है। आज वापस ड्यूटी ज्वाइन की है इसलिए कोई पत्र नगर पंचायत नामली से आया है तो उसे लेकर जांच करेंगे। जहां तक अभिषेक ओझा द्वारा फाइलों में अफरा-तफरी का मामला है तो उसके बयान नहीं हुए हैं। उसे जल्द तलब करके बयान लिए जाएंगे जिसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
हिमांशु भार्गव, जांच अधिकारी, थाना नामली
Published on:
25 Dec 2019 11:13 am
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