रतलाम। चातुर्मास के दौरान नवकार भवन में जन्माष्टमी पर विशेष प्रवचन में आचार्यश्री विजयराज महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति के गौरव पुरुष है। जन्माष्टमी का पर्व उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रेरणा लेने का पर्व है। महापुरुष कभी अतीत नहीं होते। उनका आचरण वर्तमान के लिए आदर्श और भविष्य के लिए आलोक होता हैं।
सिलावटों का वास में प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रावक-श्रावकिाओं को आचार्यश्री ने श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाई और कहा कि श्री कृष्ण, राम और महावीर जितने भी महापुरुष हुए है, वे भारतीय संस्कृति की आत्मा है। भारत में जैन, बौद्ध और वैदिक संस्कृति सभी संस्कृतियों में महापुरुषों का असीम योगदान है।
श्री कृष्ण को तीनों संस्कृतियां आदर्श मानती है
महाराजश्री ने कहा कि श्री कृष्ण को तीनों संस्कृतियां आदर्श मानती है। जैन शास़्त्र में श्री कृष्ण की कई गाथाए है। वे बुराई में भी अच्छाई ढूंढने में माहिर रहे। वर्तमान समय में लोग गुणवान लोगों में भी अवगुण ढूंढते है और अवगुणी के गुण नहीं देखते। महापुरुषों का गुणगान ही नहीं करना चाहिए, अपितु उनके गुणों को आचरण में भी लाना चाहिए। इससे जीवन धन्य होगा।
जप-तप से जीवन सफल बनाने पर बल
शुरुआत में उपाध्याय प्रवर जितेश मुनि ने अंतगढ़ सूत्र का वाचन किया। उन्होंने जप-तप से जीवन को सफल बनाने पर बल दिया। मंदसौर से आए प्रकाश रातडिया ने इस मौके पर आचार्यश्री से आगामी 1 जनवरी की महामांगलिक का लाभ मंदसौर को देने की विनती की। धर्मसभा में कई श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।