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जैन धर्म इथोपिया और साउथ अमरीका तक था…मिले जैन प्रतिक चिह्न व मंदिर

पत्रिका विशेष साक्षात्कार...साइंटिस्ट और श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. कोठारी से

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उज्जैन. जैन धर्म भारत ही नहीं इथोपिया और साउथ अमेरिका तक फैला था। वहां लोग जैन धर्म का पालन करते थे और राजा भी जैन थे। इथोपिया के जेहा में भगवान चंद्रप्रभु और आदिनाथ के मंदिर मिले है। ऐसे ही साउथ अमेरिका के पेरू, ग्वाटोमोल में क्षमोशरण के रूप में जैन मंदिर मिले है। इन स्थलों पर जैन धर्म के प्रतिक चिह्न है तो अभिषेक पंचामृत भी होना पाया है। इससे पता चलता है कि जैन धर्म कहां तक फैला हुआ था। कट्टरता के कारण जैन धर्म का प्रभाव कम हुआ। जैन धर्म को लेकर यह खुलासा वैज्ञानिक और श्री भारतवर्षीय दिगंबर महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. राजमल कोठारी ने पत्रिका से चर्चा करते हुए किया। वे पिछले 10 वर्षों से दुनियाभर में जैन धर्म से जुड़े साक्ष्य, मंदिर, उपासना ,संस्कृति आदि क्षेत्र के कार्य कर रहे हैं।

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जैन धर्म से जुड़ा सबसे बड़ा साक्ष्य मोक्ष प्रकिया का मिला
डॉ. कोठारी ने बताया कि उनके द्वारा वर्ष 2017 में अमेरिका और इथोपिया में जैन धर्म से जुड़े स्थानों की खोज की है। वे खुद इन स्थलों पर गए और यहां पाए गए अवशेष और प्रतिक चिह्न जैन उपासना से जुड़े हुए मिले हैं। उनके मुताबिक इथोपिया और अमेरिका में मिले जैन संस्कृति से जुड़े मंदिर तीन से चार हजार वर्ष पुराने मंदिर और संस्कृति है। हमारी खोज में इन क्षेत्रों में राजा जैन थे और लोग भी जैन धर्म का पालन करते थे। इस खोज से स्पष्ट हुआ है कि ऋषभदेवजी महाराज कहां तक पहुंचे थे। इन क्षेत्रों में 10 हजार वर्ष पूर्व तक जैन धर्म के साक्ष्य मिले है। इन मंदिरों में जैन धर्म से जुड़ा सबसे बड़ा साक्ष्य मोक्ष प्रकिया का मिला है, जो भारत में कहीं नहीं मिला। यहां मिले अवशेष जैन धर्म की पूजा-उपासना से जुड़े होकर क्षमोशरण की तरह मंदिर बने हुए है। डॉ. कोठारी के की खोज पर एक रिसर्च पेपर अगले वर्ष प्रकाशित होने वाला।

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अहिंसावाद के कारण जैन धर्म का क्षरण
जैन धर्म के सिकुडऩे का कारण डॉ. कोठारी ने अहिंसावादी होना बताया है। उनके मुताबिक मुगल व इसाई धर्म आने के बाद जैन धर्म को सख्ती के साथ खत्म किया गया। चूंकि जैन अंहिसा का पालन करते थे उन्होंने प्रतिकार नहीं किया। जैन धर्म की उत्पत्ति को भारत में माना जाता है। डॉ. कोठारी इससे इत्तेफाक नहीं रखते। उनका कहना है कि आज का भारत एक भारत खंड का हिस्सा मात्र है। उन्होंने दावा किया कि 24 तीर्थंकर भारत के हैं, इससे पहले के तीर्थंकर भारत खंड से हैं। इथोपिया से जैन धर्म साउथ भारत में आया। डॉ. कोठारी के अनुसार इजराइल का येरुशलम भी जैन धर्म से जुड़ा है, जिसे बाद में इसाई और मुसलमानों ने कब्जा किया।

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डॉ. कोठारी एक परिचय
डॉ. राजमल जैन कोठारी भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला अंतरिक्ष विभाग अहमदाबाद में वरिष्ठ वैज्ञानिक व प्रोफेसर रहे हैं। वे स्पेस से जुड़े सूर्य, चंद्रायान, मंगल और आदित्य मिशन के उपकरण डिजाइन से जुड़े रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ, भारत की खगोलीय संघ के सदस्य है। जर्नल ऑफ स्पेस एंड रेडियो फिजिक्स, एशियन जर्नल ऑफ फिजिक्स पत्रिका के संपादक है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय जैन विद्धत संघ न्यूयार्क तथा अंतरराष्ट्रीय अंहिसा मिशन अहमदाबाद के के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष है।

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