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Lok Sabha Election 2024 : यहां 17 में से 12 बार हुई भाजपा की जीत, अब कांग्रेस चाहती नहीं ​खिले कमल

हर बार भाजपा को जीत झोली में देने के बाद भी नहीं बना कभी कोई सांसद केंद्र में मंत्री

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रतलाम। देश में लोकसभा चुनाव की तैयारी में हर दल लग गया है। मध्यप्रदेश में जावरा - मंदसौर - नीमच संसदीय सीट से भाजपा ने सुधीर गुप्ता को टिकट देकर प्रत्याशी चयन में कांग्रेस से बाजी मार ली है। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से देखा जाए तो यहां 17 में से 12 बार भाजपा की जीत हुई है। संसदीय क्षेत्र कांग्रेस के लिए चुनौती रहा है। हैरानी की बात ये है कि हर बार सत्ता को सांसद देने के बाद भी किसी को यहां से केंद्र सरकार में मंत्री नहीं बनाया।

अब तक हुए 17 लोकसभा चुनाव में 12 बार जनसंघ व भाजपा को लोकसभा चुनाव में जीत मिली है। कांग्रेस ने सिर्फ पांच बार जीत का स्वाद चखा है। कांग्रेस को अंतिम बार जीत 2009 में तब मिली थी जब प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने आठ बार से सांसद रहे भाजपा के डाॅ लक्ष्मीनारायण पाण्डेय को हराकर इतिहास रच दिया था। इसके बाद 2014, व 2019 के चुनावों में नटराजन को पराजय का सामाना करना पड़ा। 1971 से 2009 तक लगातार 11 बार डाॅ पाण्डेय जनसंघ व भाजपा के उम्मीदवार रहे। हालांकि आठ बार विजयी रहे डॉ पांडेय को 1980, 1984, व 2009 में पराजय मिली।

सबसे कम मत से मिली जीत

मंदसौर संसदीय क्षेत्र में सबसे कम मतों से जीतने का रिकार्ड कांग्रेस के भंवरलाल नाहटा के नाम है। नाहटा 1980 में मात्र 2653 मतों से विजयी रहे थे ओर सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकार्ड वर्तमान सांसद सुधीर गुप्ता के नाम रहा है। गुप्ता 2019 में 3 लाख 76 हजार 734 मतों से विजयी हुए थे। गुप्ता 2014 में भी 3 लाख 3 हजार 649 मतों से विजयी रहे थे। अब तक इतने मतों से कोई भी उम्मीदवार विजयी नहीं रहा। आजादी के बाद हुए पहले दो चुनाव 1952 व 1957 में कांग्रेस को जीत मिली। उसके बाद 1962, 1967, 1971, 1977, में जनसंघ भाजपा लगातार जीती। 1980, व 1984 में कांग्रेस दो बार फिर जीती। उसके बाद कांग्रेस को एकमात्र जीत 2009 में मिली। 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, 2004 लगातार छह बार भाजपा को जीत मिली। हैरानी की बात ये है कि लगातार भाजपा की झोली में सांसद देने वाले इस संसदीय क्षेत्र से किसी भी नेता को पार्टी ने केंद्र में मंत्री नहीं बनाया।

पराजय के सदमे में पार्टी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को संसदीय क्षेत्र की आठ में से मात्र एक सीट पर जीत मिली। ऐसे में इस चुनाव में भाजपा अपने पुराने जीत के रिकॉर्ड को कायम रखने मैदान मे उतरी है तो कांग्रेस चाहेगी की वो पराजय के दंश से बाहर आए। नीमच, मंदसौर व जावरा में पार्टी पराजय के सदमे से बाहर नहीं आ पाई है।

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