
datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)
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रतलाम। डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार वास्तविक क्लिनिकल मामलों पर आधारित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) का आयोजन किया। क्षय एवं श्वसन रोग (टीबी एवं चेस्ट) विभाग द्वारा आयोजित इस सीएमई का विषय चैलेंजिंग पल्मोनरी केसेज़ ए केस सीरीज़ फ्रॉम रतलाम एंड द ट्राइबल रीजन रहा। इसमें शहर एवं आसपास के आदिवासी अंचलों से प्राप्त जटिल फेफड़ों के रोगियों के मामलों का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डीन डॉ. अनिता मुथा ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए वास्तविक रोगियों के अनुभवों पर आधारित शिक्षण अत्यंत आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम चिकित्सकों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों की नैदानिक क्षमता को सुदृढ़ करते हैं तथा रोगियों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सीएमई के मुख्य वक्ता एवं टीबी एवं चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. दीपक नागर ने रतलाम एवं आदिवासी क्षेत्रों से जुड़े ऐसे जटिल रोगियों के वास्तविक मामलों को प्रस्तुत किया, जिनका निदान अनेक बार चुनौतीपूर्ण होता है और जिनमें गलत निदान (मिसडायग्नोसिस) की संभावना बनी रहती है। उन्होंने प्रत्येक केस के माध्यम से रोग की पहचान, क्लिनिकल संकेतों, आधुनिक जांच पद्धतियों, विभेदक निदान तथा नवीनतम उपचार प्रोटोकॉल पर विस्तृत एवं साक्ष्य-आधारित जानकारी दी।
इन पर की विशेष बात
कार्यक्रम में इंटरस्टिशियल लंग डिज़ीज़ (आईएलडी), ऑर्गेनाइजिंग न्यूमोनिया, पल्मोनरी एम्बोलिज़्म, ब्रॉन्किइक्टेसिस, एलर्जिक ब्रॉन्कोपल्मोनरी एस्परजिलोसिस (एबीपीए) तथा स्किन ट्यूबरकुलोसिस सहित अनेक जटिल श्वसन रोगों के वास्तविक मामलों पर गहन चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने इन रोगों के निदान में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों, रेडियोलॉजिकल एवं पैथोलॉजिकल निष्कर्षों तथा समय पर उपचार की आवश्यकता पर विशेष प्रकाश डाला। सीएमई रतलाम मेडिकल कॉलेज के इतिहास में अपनी तरह का पहला आयोजन रहा, जिसमें पारंपरिक व्याख्यानों के स्थान पर वास्तविक रोगियों के केस-आधारित अध्ययन को केंद्र में रखा गया। इस अभिनव पहल ने प्रतिभागियों को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर क्लिनिकल निर्णय क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान किया। चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों ने इसे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक प्रभावी और प्रेरणादायक पहल बताया।
इनकी रही मेहनत
आयोजन टीबी एवं चेस्ट विभाग की टीम द्वारा किया गया, जिसमें डॉ. दीपक नागर (विभागाध्यक्ष), डॉ. महेश पाटीदार (सहायक प्राध्यापक), डॉ. नमन देवपुरा (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. अदिति पटेल (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. डॉली खंडेलवाल (जूनियर रेजिडेंट), डॉ. नमन दिसावल (जूनियर रेजिडेंट), डॉ. जयेश अहिरवार (जूनियर रेजिडेंट) तथा डॉ. विशाल कटारिया (जूनियर रेजिडेंट) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
Updated on:
19 Jul 2026 06:00 am
Published on:
19 Jul 2026 06:00 am
