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MP Election 2023: 109 साल की अवंतीबाई,106 साल के नागूलाल करेंगे मतदान, बाेले ‘उमर तो घणी है, वोट जरूर दांगा, अपणो कई, सबने जानो चाइये’

-जागो जनमत....जज्बा 109 और 106 साल के इन वोटर्स में देखिए, शतायु में भी मतदान का जुनून...

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'म्हारी उम्र तो घणी है...ई दीवार नी थी देश में...गारा की ओरा कर लेता...खारोबा बांध देता न गारो लाखी ने भाटा बिछाई ने कमाड़ा आड़ा दई देता...म्हारे हुणाए और दिखे भी कम दासा...वोट जरुर दांगा, अपणो कई, सबने वोट डालवा जानो चाईये...। गीताबाई भी वोट डालवा जागा, पण अबार यहां नी है।' ये कहना है टैंकर रोड निवासी 106 वर्षीय नागूलाल राठौड़ का जो इस उम्र में भी मतदान के लिए उत्साहित है। इधर अवंतीबाई कहती है कि 'अबार भी खुशी से वोट डालवा जाउंगा। सुखेड़ा निवासी 109 वर्षीय अवंतिबाई से जब बात की गई तो उनका कहना थै कि म्हारो नाम अवंतीबाई और मैं 109 साल की हूं। अबार भी मतदान कवरा वोट डालवा खुशी से जाउंगा। सब भाई-बहणा ने भी वोट डालवा जानो चाइये।'

उम्र और सेहत को मात देते हुए शतायु पार बुजुर्ग भी मतदान करने को उत्साहित हैं, इस उम्र में लड़खड़ाती और परम्परागत शैली से लोगों को भी मतदान करने के लिए जागरूक कर रहे हैं। जिले में 80 से अधिक उम्र वाले मतदाताओं को बात करें तो इस बार 14,236 मतदाता मतदान करेंगे, इनमें से कुछ शतायु हैैं। पत्रिका ने जागो जनमत अभियान के अन्तर्गत शहर सहित जिले में निवासरत शतायु पार बुजुर्गों से मिलकर चर्चा कर उनके विचार जाने। शहर के टैंकर रोड के 106 वर्षीय नागूलाल राठौड़, 103 वर्षीय गीताबाई के अलावा बिरियाखेड़ी निवासी 100 वर्षीय मेहताब बाई मतदान के लिए उत्साहित नजर आई।

प्रशासन ने किया था सम्मानित

शतायु पार मतदाताओं को पिछले दिनों ही जिला प्रशासन ने सम्मान किया था। हालांकि इस बार मतदान के लिए इनके घर तक निर्वाचन विभाग पहुंचने की व्यवस्था कर रहा है। इसके बावजूद बुजुर्ग यह कहते दिख रहे हैं कि मतदान के लिए अगर बूथ तक भी जाना होगा तो वे मतदान अवश्य करेंगे। न केवल वे मतदान करेंगे बल्कि घर के तमाम सदस्यों को भी मुखिया के नाते मतदान के लिए प्रेरित करेंगे। यह अलग बात है कि इनमें से कई मतदाताओं को सुनाई भी नहीं देता है। कइयों के लड़खड़ाते हुए कदम हैं। इसके बावजूद मतदान का नाम लेते ही जोश में दिखते हैं।

पहले कुछ भी नहीं था

शतायु पार मतदाता बताते हैं कि वे जब पहली बार मतदान करने गए तो सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं था। प्रचार का जोर भी इतना नहीं रहता था। कागज की पर्चियां थी। पर्ची बदलने व छीनने जैसे शिकायतें भी इक्का दुक्का आती थी, लेकिन एक उत्सवी माहौल गांव में तैयार हो जाता था। प्रारंभ में तो महिलाओं का मतदान प्रतिशत भी कम रहता था लेकिन धीरे धीरे जागरूकता आई और अब महिलाएं भी शत प्रतिशत मतदान के लिए आगे आ रही है। गौरतलब है कि पत्रिका के जागो जनमत अभियान के तहत इन दिनों अधिकाधिक मतदान के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इसमें जहां यंग वोटर्स से बात की जा रही है तो मतदान के लिए अलग अलग समूह में शपथ भी दिलवाई जा रही है।

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