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MP Panchayat Chunav 2022: गांव सरकार के लिए कैसी-कैसी पोस्ट

पहली बार सोशल मीडिया का हो रहा जमकर इस्तेमाल

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सचिन त्रिवेदी, रतलाम.
कभी लाउडस्पीकर (भोंपू) और रंग-बिरंगे पर्चो के सहारे लड़े जाने वाले गांव सरकार (ग्राम पंचायत) के चुनाव का दृश्य काफी बदल गया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 3 चरण वाले चुनाव का मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से होना है, लेकिन प्रचार के मैदान में अब पुराने संसाधन पूरी तरह गायब हो गए हैं। इनके स्थान पर हाईटेक संसाधनों का उपयोग हो रहा है। गली-मोहल्लों में वार्डो के प्रत्याशी अपने दावे के साथ सीधे मोबाइल पर वीडियो भेज रहे हैं तो ट्वीटर और फेसबुक जैसे सोशल प्लेटफॉर्म पर प्रचार के लिए निजी एजेंसियों की मदद तक ली जाने लगी है। वहीं, राजनीतिक दलों ने भी कारर्पोरेट की तर्ज पर गांव के चुनाव का प्रबंधन तैयार किया है। प्रत्याशी चयन से पहले बकायदा जनता से फीडबैक लिया जा रहा है तो सोशल मीडिया पर सक्रियता भी बड़ा पैमाना बन गई है। बता दें कि रतलाम, मंदसौर और नीमच जिले के 3 हजार से ज्यादा गांव में सरकार चुनने के लिए 3 चरणों 25 जून, 1 जुलाई और 8 जुलाई को मतदान होगा व 14-15 जुलाई को परिणाम आएंगे। पहले चरण के लिए नामांकन जांच की प्रक्रिया चल रही है। 10 जून को चुनाव चिन्होंं का आवंटन कर दिया जाएगा।

कुछ इस तरह बदल रहा गांव सरकार का प्रचार
पंचायत चुनाव के पहले चरण से पहले ही जिला, जनपद, सरपंच और पंच पद के प्रत्याशी प्रचार के मैदान में उतर गए थे, हालांकि चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद असल प्रचार नजर आएगा, लेकिन प्रत्याशियों की तैयारी के साथ ही बदलाव का दृश्य दिखाई देने लगा है। जिला पंचायत के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद सिंगल नाम वाले कई प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया पर प्रचार शुरू कर दिया है। कुछ प्रत्याशी तो वीडियो संदेश भेज रहे हैं, इनमें बकायदा संबंधित जिला पंचायत वार्ड के मुद्दों पर बात रख रहे हैं। यहीं नहीं, सरपंच और पंच के पदों पर भी भाग्य आजमाने वाले सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले युवाओं की मदद ले रहे हैं। गांव में वाट्सएप पर वार्डो का ग्रुप बनाकर मतदाताओं को इससे जुडऩे की लिंक भेजी जा रही है।

IMAGE CREDIT: patrika

फेक पोस्ट व संदेशों की निगरानी का नहीं तंत्र
पंचायत चुनाव में खर्च की कोई सीमा निर्धारित नहीं है, लेकिन महंगाई का असर यहां भी नजर आ रहा है। प्रत्याशी चुनावी तैयारी के बीच प्रचार के लिए सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं तो फेक पोस्ट का खतरा भी मंडरा रहा है। रतलाम जिले के धराड़ से एक प्रत्याशी के पक्ष में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर घोषणा पत्र जारी किया गया है, इसमें गांव में हवाई अड्डा की सुविधा, नल-जल योजना में दूध सप्लाई करने के साथ कई विवादित बिन्दु है। इसी तरह एक अन्य पोस्ट भी वायरल हो रही है, जहां चुनाव में जीत दिलाने के नाम पर अंध-विश्वास फैलाती बात दर्शाई है तो चुनाव में जीत की गारंटी भी ली जा रही है। इस तरह की पोस्ट पर कार्रवाई संबंधी नियम स्पष्ट नहीं है तो प्रत्याशियों के दावों-वादों की निगरानी भी मुश्किल है।

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ये बोले प्रत्याशी....सोशल प्लेटफॉर्म से घर-घर पहुंच
रतलाम से जिला पंचायत का चुनाव लड़ रहे सत्यनारायण व्यास बताते हैं कि यह दौर ही सोशल मीडिया का है, पहले प्रचार के संसाधन अलग थे, अब तो सीधे वीडियो संदेश भेजकर अपनी बात रखने की सुविधा है, कई प्रत्याशी ऐसा कर रहे हैं। वहीं, मंदसौर जिले के वार्ड क्रमांक 4 से प्रत्याशी से दीपक गुर्जर की माने तो महंगाई के कारण प्रचार वाहन करने के बजाय वाट्एसप पर ग्रुप बनाकर संदेश देना आसान है, इसमें सोशल मीडिया फे्रंडली युवा साथ दे रहे हैं। बरडिया स्तुंबर से सरपंच प्रत्याशी उच्च शिक्षित निकिता सिसोदिया का भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट है और वे नियमित तौर पर अपनी बात भी रख रहीं है। नीमच से जनपद वार्ड प्रत्याशी यामिनी चौहान ट्वीटर और फेसबुक पर चुनावी मुद्दों को शेयर कर रहीं है।

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