
विशिष्ट कृपा से मिली दुर्लभ मानव देह
रतलाम. आचार्यश्री जिनचन्द्रसागर सूरि महाराज के 67वें जन्मोत्सव चतुर्विद श्रीसंघ ने भक्ति भावना के साथ मनाया। सभी ने आचार्य श्री के दर्शन वन्दन कर उनके स्वस्थ्य और सुदीर्ध संयम जीवन की मंगलकामनाए की। गुरुवर ने कहा कि प्रभु ने हम पर विशिष्ट कृपा कर यह दुर्लभ मानव देह प्रदान किया है। हम इसे तप-आराधना और साधना से सफल बनाए। ऐसा मौका बार-बार नहीं मिलता है।
धर्म जागरण चातुर्मास के 87वे दिन आगमोउद्धारक वाटिका और करमचंद उपाश्रय में आचार्यश्री के जन्मोत्सव को लेकर उत्साह, उमंग और उत्सव का वातावरण रहा। यंहा आकर्षक और सुंदर रंगोली सजाते हुए तोरण लगाए गए थे। वे उपाश्रय में आए रतलाम सहित गुजरात, महाराष्ट्र अदि स्थानों से आये भक्तों उन्हें वन्दन करते हुए मंगल भक्ति गीतों से शुभेच्छा भेंट की।
भावशून्य वंदना से मन, वचन, काया की शुद्धि नहीं होती : वंदन करो, तो उसमें भावों का धागा पिरोया होना चाहिए। भावशून्य वंदना फलदायी नहीं होती। इससे मन, वचन, काया की शुद्धि नहीं होती। वंदना भावपूर्ण होना चाहिए। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मान, माया से मुक्त होने पर ही भाव बनते है। यह विचार दीक्षा दानेश्वरी आचार्यश्री रामेश ने व्यक्त किए। समता कुंज में बुधवार सुबह अमृत देशना के दौरान उन्होंने कहा कि हम वंदना करते है, तो किसी पर एहसान नहीं करते है। वंदना हमेशा अपने लिए की जाती है। इसका उद्देश्य पुण्य का संचय करना होता है, इसलिए यह समझना जरूरी है कि भावपूर्ण वंदन से ही कर्म निर्झरा होती है। आजकल लोग एक्सप्रेस ट्रेन जैसी वंदना करते है। एक-डेढ़ मिनट में माला पूरी नहीं होती और तीन-चार मिनट में भक्तामर पाठ नहीं होता, लेकिन लोग इसे करने का दावा करते है। ऐसी वंदना का कोई फायदा नहीं होता, क्योंकि इसमें भाव शून्य रहते है। आदित्य मुनि ने बुराईयों का त्याग करने का आव्हान किया। इस मौके पर नई दिल्ली निवासी चेतनमल-कंचनदेवी सुराना ने आजीवन शीलव्रत का संकल्प लिया। कई तपस्वियों ने अलग-अलग तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। संचालन बाबूलाल सेठिया ने किया।
साध्वी पुण्यशीलाश्री महाराज के सानिध्य में 33 मासक्षमण पूर्ण
रतलाम. श्री धर्मदास जैन मित्र मण्डल नौलाईपुरा स्थानक पर विविध धार्मिक आराधनाएं हो रही है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं और बच्चें उत्साहपूर्वक भाग ले रहे है। श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ के अध्यक्ष शैलेष पीपाड़ा, महामंत्री अरविन्द मेहता और सचिव नरेन्द्र गांधी ने बताया कि-साध्वीश्री के सानिध्य में यहां तपस्वी प्रमोद सालेचा, राकेश झामर, दीप्ति मूणत ने 31-31 उपवास तथा प्रवीण खुणिया व अनिल कोठारी ने 30-30 उपवास की कठोर तपस्या पूर्ण की। उल्लेखनीय है कि तपस्वी अनिल कोठारी साध्वी रेणुप्रभाश्री के सांसारिक काका और प्रवीण खुणिया साध्वी चतुर्गुणाश्री व अनंतगुणा श्री के सांसारिक भाई हैं। वर्षावास में अभी तक 33 मासक्षमण पूर्ण हो चुके है। अणु मित्र मण्डल के अध्यक्ष विनय लोढ़ा, महामंत्री राजेश कोठारी और सचिव मिलिन गांधी ने बताया कि-तपाराधकों की तपस्या पूर्ण होने पर श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ द्वारा श्री धर्मदास जैन मित्र मण्डल नौलाईपुरा स्थानक पर बहुमान समारोह आयोजित किया गया। बहुमान समारोह को साध्वी मण्डल ने संबोधित किया। संचालन सौरभ कोठारी ने किया।
Published on:
18 Oct 2018 05:48 pm
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