
रतलाम। ओ बा, असी वे टेरेन, ए चुप कर, अपणे उपर अई जावेगा। एे श्याम देख, यां तो घणी देर तक उबी है, चल इने अपणे चलावां। ये मालवी के उच्चारण थे, रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार को। असल में यहां पर समीपस्थ ग्राम मांगरोल के माध्यमिक व हाईस्कूल के विद्यार्थी शैक्षणिक टूर पर आए थे। करीब १२५ में से ३० विद्यार्थी एेसे थे, जिन्होंने ट्रेन ही जिंदगी में पहली बार देखी थी।
विद्यालय के प्राचार्य आरएल हारी जब दोपहर करीब १२ बजे इन विद्यार्थियों को लेकर पहुंचे तो इनके लिए रेलवे स्टेशन कोतुहल का विषय था। एक के पीछे एक अनुशासित तरीके से चल रहे विद्यार्थी यात्रियों के लिए भी कोतुहल का विषय थे। इन विद्यार्थियों ने स्टेशन के विभिन्न प्लेटफॉर्म का निरीक्षण किया। यहां खाद्य सामग्री किस तरह बिक्री होती है, स्टॉल किस तरह चलते है, प्याऊ में पानी कहां से आता है, पटरी पर जो बॉक्स है, वह क्या है, इसका काम किस तरह होता है जैसी जानकारी ली।
बुलबुल ने लगाया इंजन को हाथ
कक्षा ९ में पढऩे वाली बुलबुल ने अब तक ट्रेन तो दूर की बात, रेलवे स्टेशन ही जिंदगी में नहीं देखा था। पहली बार जब इंजन देखा तो हाथ लगाने का मोह नहीं छोड़ पाई। डरते-डरते इंजन को हाथ लगाया। इसी प्रकार कक्षा १० में पढऩे वाले श्याम राठौर व दिनेश निनामा ने भी पहली बार ट्रेन व रेलवे स्टेशन को देखा। टॉवर में जाने के बाद जहां दिनेश ने लाल-हरी-पीली लाइट का मतलब जाना तो एसी प्रतिक्षालय में पहुंचने के बाद देर तक विद्यार्थी बाहर नहीं आना चाह रहे थे। करीब एक घंटे से अधिक देर तक प्लेटफॉर्म पर रहने के दौरान विद्यार्थियों ने टिकट खिड़की, सफाई कार्यालय आदि देखा।
पहली बार देखी ट्रेन
यहां विद्यार्थियों को फिल्म सॉरी डेडी दिखाने लाए थे। इस दौरान उनको रेलवे स्टेशन व उससे जुडे़ विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा वे दो बत्ती स्थित स्टेशन रोड पुलिस थाने भी गए व पुलिस के काम करने के तरीकोंं को भी देखा।
- आरएल हारी, प्राचार्य, मांगरोल हाईस्कूल
Published on:
25 Nov 2017, 8:45 PM IST
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