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इसरो की मदद से रोकेंगे रेल दुर्घटना

मंडल में ५० से अधिक रेल फाटक पर होगा लाभ, मानव रहित रेल फाटक पर नया प्रयोग

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रतलाम। रेल मंडल में आने वाले दिनों में मानव रहित रेल फाटक पर एक भी ट्रेन दुर्घटना मानवीय भूल की वजह से नहीं होगी। इसके लिए रेलवे ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद ली है। इसरो एेसी प्रणाली विकसित करने जा रहा है, जिसमें ट्रेन के करीब ५०० मीटर दूर रहने पर अपने आप फाटक पर हूटर बजने लगेंगे। इसके लिए इसरो ने रेलवे को हां कर दी है। मंडल में इस तकनीक से करीब ५० से अधिक रेल फाटक पर लाभ होगा, जो मानवरहित है।

इसरो ने रेलवे के कहने पर एक विशेष तकनीक बनाने पर काम शुरू कर दिया है। सुरक्षित यात्रा के लिए रेलवे व इसरो मिलकर काम करेंगे। इसके लिए इसी सप्ताह रेलवे ने इसरो से मदद मांगी है। इसमंे रेलवे ने इस प्रकार की तकनीक विकसित करने को कहा जो मानव रहित रेल फाटक पर काम करें। रेलवे के संरक्षा विभाग में काम करने वाले मंडल के अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक के आने के बाद सबसे बड़ा लाभ तो मंडल में ही होगा।

मंडल में हुई है दो दुर्घटनाएं

बीते तीन वर्षो में मंडल में मानवरहित रेल फाटक पर दो बड़ी दुर्घटना हुई है। रतलाम-जावरा के बीच ओखा-नाथद्वारा ट्रेन के आने के दौरान ट्रक से टक्कर हो गई थी। इसके अलावा मुंडलाराम रेल फाटक के करीब भी गैस के खाली सिलेंडर ले जा रहे वाहन से यात्री ट्रेन की टक्कर हुई थी। हालाकि इन दोनों दुर्घटना में बड़ी मानव त्रासदी न हुई, लेकिन कुछ समय तक रेल यातायात प्रभावित जरूर हुआ। एेसे में इस तकनीक के आने का लाभ मंडल को जरूर होगा। इस समय मंडल में करीब २७ मानवरहित रेल फाटक को बंद किया जा चुका है, जबकि करीब ५० से कुछ अधिक मानवरहित रेल फाटक है।

इस तरह काम करेगी तकनीक

रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन की पटरी पर विशेष प्रकार के सेंसर लगाए जाएंगे। जैसे ही करीब ५०० मीटर से लेकर एक किमी की दूरी पर ट्रेन होगी, मानवरहित रेल फाटक पर लगाया गया सायरन या हूटर बजने लगेगा। विशेष सेंसर ट्रेन के संपर्क में आते ही एक्टिव हो जाएगा। हूटर बजने से दो या चार पहिंया वाहन चालक को पता चल जाएगा की ट्रेन आने वाली है, इसलिए वाहन को ट्रेन के निकलने तक रोक दिया जाए।

लगातार नए प्रयोग

यात्रियों को सुरक्षित यात्रा कराने के लिए रेलवे लगातार नए प्रयोग कर रही है। ये कदम उसी कड़ी का एक हिस्सा है। इसके लिए इसी माह की शुरुआत में रेलवे व इसरो के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस तकनीक से मंडल में भी लाभ होगा।

- दिलीप गुप्ता, सदस्य, पश्चिम रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति