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उज्जैन महाकाल के दरबार में दमकेगा रत्नपुरी त्रिशूल

सौला गेज स्टील का त्रिशूल महाकाल के दरबार में बरसों तक बिखेरेगा चमक, भक्तों ने पंचमुखी दीनदयाल नगर से निकाली शोभायात्रा

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रतलाम। जयश्री महाकाल के जयकारों के साथ पंचमुखी हनुमानमंदिर दीनदयाल नगर से शिव भक्त ने धूमधाम से त्रिशूल शोभा यात्रा निकाली। यात्रा में १५१ किलो वजनी २५ फीट लम्बा त्रिशूल वाहन में स्थापित कर नगर भ्रमण करवाया गया। रास्ते भर पुष्पवर्षकर स्वागत किया, वहीं महिला-पुरुष भक्तों में भक्ति गीतों पर जमकर नृत्य किया। शोभायात्रा प्रजापति भेरूलाल रतनलाल विजिया के नेतृत्व में दीनदयाल नगर से बाजना बस स्टैंड, लक्कड़पीठा, चांदनीचौक, त्रिपोलिया गेट, रामगढ़, रविदास चौक होती हुई करमदी रोड स्थित सावलिया जी मंदिर पर पहुंची। भक्त भेरूलाल ने बताया कि २२ फरवरी को त्रिशूल का चल समारोह उज्जैन में भी निकाला जाएगा। यहां से वाहन में रखकर उज्जैन पहुंचकर सुबह ९ बजे नलियाबाखल मेवाड़ा प्रजापति धर्मशाला से त्रिशूल का चल समारोह शुरू होगा। जो प्रमुख मार्गों से होता हुआ महाकांल मंदिर पहुंंचेगा।


उज्जैन के बाबा महाकाल को रत्नपुरी का भक्त भेरूलाल प्रजापति डायमंड कट में गेज स्टील से तैयार १५१ किलो वजनी २५ फीट लम्बी त्रिशूल अर्पण करेगा। त्रिशूल निर्माण में एक माह का समय लगा और एक लाख के करीब लागत आई। कोटावाला बाग में पहली बार त्रिशूल बना रहे राधेश्याम पांचाल ने बताया कि सौला गेज स्टील का त्रिशूल की चमक बरसों तक नहीं जाएंगी। इस बनाने में तीन कारिगर लगे, जिसकी लम्बाई २५ फीट होकर ४८ इंच चौड़ा रहेगा। डमरू में एसएस की रस्सी रहेगी, जिसमें ओम, स्वास्तिक और गजरी भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। २२ फरवरी को उज्जैन महाकांल मंदिर में स्थापित किया जाएगा।


उज्जैन में भी निकलेगा चल समारोह
भक्त भेरूलाल प्रजापति ने बताया कि महाकाल के दरबार में त्रिशूल चढ़ाने की भावना थी, वह आज पूरी हो रहो रही है। महाकाल के दर्शन के बाद बरसों से एक लगन सी थी और जो भी कार्य होता वह महाकाल के नाम से ही शुरू किया जाता रहा है। इसे त्रिशूल को स्थापित करने के संबंध में उज्जैन कलेक्टर से भी इजाजत ले ली गई है। उज्जैन त्रिशूल २२ फरवरी को पहुंच जाएगा। वहां सुबह ९ बजे नलियाबाखल मेवाड़ा प्रजापति धर्मशाला से चल समारोह शुरू किया जाएगा। जो महाकाल मंदिर १२.१५ बजे पहुंचेगा।

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