
Rakshabandhan 2023 : कलाई पर सजा सद्भाव का संसार, मुस्लिम बहन ने हिंदू भाई की कलाई पर बांधी राखी
मैं आंधियों से क्यों डरूं जब मेरे अंदर ही तूफान है, मैं मंदिर-मस्जिद क्यों भटकूं जब मेरे ही अंदर भगवान है। प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राणा की ये पंक्तियां कट्टरवादी ताकतों को देखते हुए लिखी गई होगी, लेकिन मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के अंतर्गत आने वाले जावरा शहर में इन लाइनों को दो परिवारों ने अपने अंदर उतार लिया लगता है। पिछले 30 वर्षों से दोनों परिवार धर्म संप्रदाय और जाति के बंधन से मुक्त होकर एक दूसरे के साथ त्यौहार में शामिल हो रहे हैं।
जावरा शहर को प्रदेश भर में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करने वाला शहर भी माना जाता है। शहर में रहने वाले सभी धर्मों के लोग अकसर मानवता की मिसाल पेश करते हुए सभी त्योहार जोश और उमंग के साथ मनाते हैं।
लंबे समय से रस्म निभाता आ रहा है शीरीन और दीपक का परिवार
शहर के रावण द्वार इलाके में रहने वाले दीपक पोरवाल को शहर के पिछली और रहने वाली बहन शीरीन ने राखी बांधी बदले में पोरवाल ने अपनी बहन को उपहार दिया। दीपक पोरवाल ने बताया कि, उनके पिता सत्यनारायण पोरवाल के समय से उनके परिवार का शीरीन के परिवार के साथ ये रिश्ता जुड़ा हुआ है। पिता के स्वर्गवास के बाद से ये रिश्ता हम दोनों भाई-बहन निभाते आ रहे हैं। शीरीन ने दीपक को रक्षा सूत्र बांधकर आरती उतारी। इसके बाद शुभ का प्रतीक माना जाने वाला पान खिलाया। साथ ही, अपने भाई की लंबी आयु की कामना की।
Published on:
30 Aug 2023 07:04 pm
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