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GST में रियल एस्टेट सेक्टर: टैक्स बोझ घटने से घर खरीदना होगा सस्ता

जीएसटी लागू होने के बाद घर खरीदार को पूरे उत्पाद पर केवल अंतिम टैक्स देना होगा और जीएसटी के तहत यह अंतिम टैक्स लगभग नगण्य होगा

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Sunil Sharma

Oct 13, 2017

bangla

GST on house

नई दिल्ली। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवा को कहा कि जल्द ही रियल्टी को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा। अगर, ऐसा हुआ तो इसका सबसे बड़ा फायदा घर खरीदार को होगा। ऐसा इसलिए कि अभी घर खरीदारों को प्रॉपर्टी की खरीदारी पर स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, वैट आदि टैक्स भी देने होते हैं।

जीएसटी लागू होने के बाद घर खरीदार को पूरे उत्पाद पर केवल अंतिम टैक्स देना होगा और जीएसटी के तहत यह अंतिम टैक्स लगभग नगण्य होगा। इससे प्रॉपर्टी पर टैक्स का बोझ कम होगा। अभी, प्रॉपर्टी की कुल कीमत का लगभग 7 से 8 फीसदी टैक्स के रूप में चुकाना होता है। जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स का बोझ कमने से कीमतों कम होंगी।

कीमतें कम कैसे होंगी
रियल एस्टेट एक्सपर्ट मुकेश कुमार झा ने बताया कि अभी रेडी टू मूव प्रॉपर्टी में घर खरीदारों को इनपुट क्रेडिट का लाभ नहीं मिलता है। जीएसटी में आने के बाद खरीदार को भी इनपुट क्रेडिट का लाभ मिलेेगा। इससे उसकी टैक्स देनदारी कम होंगी। यानी, वह कम बजट में भी अपने सपने का घर खरीद पाएगा।

एक फीसदी होता है रजिस्ट्रेशन टैक्स
रजिस्ट्रेशन टैक्स लगभग एक फीसदी होता है, जो अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार भिन्न हो सकता है। इसे जमा करने के लिए खरीदार और विक्रेता दोनों को प्रॉपर्टी के लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों,स्टांप ड्यूटी चुकाने की रसीद कॉपी और परिचय पत्र के साथ रजिस्ट्रार ऑफिस में रहना होता है।

घर खरीदार को होगा बड़ा लाभ
रियल एस्टेट एक्सपर्ट प्रदीप मिश्रा के मुताबिक जीएसटी आने के बाद टैक्स का बोझ घर खरीदार पर काफी कम हो सकता है। ऐसा इसलिए कि इनपुट क्रेडिट का लाभ सप्लायर्स से लेकर बिल्डर को मिलेगा। होम बायर्स सबसे अंत में आएगा। यानी, उसको सबसे कम टैक्स का भुगतान करना होगा। ऐसा होने से घर खरीदने की लागत कम होगी जिससे वह कम बजट में भी अच्छी प्रॉपर्टी का सौदा कर सकेगा।

रेडी टू मूव प्रॉपर्टी पर लगने वाले टैक्स
स्टांप ड्यूटी सेल एग्रीमेंट पर लगाई जाती है ताकि खरीदने और बेचने वाले को एक कानूनी प्रक्रिया में जोड़ा जा सके। इसकी गणना प्रॉपर्टी के बाजार भाव या एग्रीमेंट में दर्शाई गई कीमत (दोनों में से जो ज्यादा हो) के हिसाब से लगाई जाती है। रजिस्ट्रेशन ऑफिसर रेडी रेकनर रेट (आरआर रेट) के आधार पर बाजार भाव निर्धारित करते हैं। विभिन्न राज्यों में स्टांप ड्यूटी शुल्क तीन से सात फीसदी के बीच अलग-अलग है।