
राज्य सरकार होटल ग्रुप्स के सामने नतमस्तक होती दिख रही है। पर्यटन को बढ़ावा देनेे के नाम पर सरकार ने होटल ग्रुप्स को सस्ती दर पर जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत शहरी क्षेत्र में होटल खोलने के लिए आवासीय डीएलसी और गांवों में कृषि डीएलसी दर पर जमीन आवंटन हो सकेगा। राज्य सरकार राजस्थान पर्यटन इकाई नीति २०१७ ला रही है। कैबिनेट ने सर्कुलेशन से इसको मंजूरी दे दी है। इसमें सरकार ने होटल के लिए भूमि आवंटन के लिए नियमों में फेरबदल कर दिया है।
वहीं सरकार ने पर्यटन विभाग के प्रस्ताव को मानते हुए नगरीय विकास विभाग और राजस्व विभाग की आपत्तियों को भी दरकिनार कर जमीन आवंटन के तीन बड़े बदलाव किए।
10 वर्षों में स्वीकृत परियोजनाएं
वर्ष संख्या
2007—08 47
06—09 24
09—10 23
10—11 16
11—12 09
12—13 10
13—14 08
होटल का प्रकार भूखंड -- साइज (वर्ग मीटर में)
बजट और 1/2/3 सितारा-- १२०० से ४०००
4 सितारा-- ६००० से १२०००
5 सितारा-- १८,००० से ४०,०००
अन्य पर्यटन इकाई 40,000 से अधिक
क्या होंगे जमीन आवंटन के लिए नियमों में तीन बड़े बदलाव
1. शहरी क्षेत्र में होटल तो...
होटल खोलने के लिए जमीन आवंटन सीधे ही आवासीय डीएलसी दर पर करने का निर्णय। जबकि अब तक व्यावसायिक, आरक्षित या डीएलसी दर पर होता रहा है। कई बार आवंटन नीलामी से भी।
स्वायत्त शासन विभाग का विरोध...पर्यटन विभाग के इस प्रस्ताव का स्वायत्त शासन विभाग ने विरोध किया और होटल के लिए भूमि आवंटन व्यावसायिक दर पर करने की सिफारिश की।
पर्यटन विभाग का अजीब तर्क...पर्यटन को उद्योग का दर्जा है। आवंटन औद्योगिक डीएलसी से होना चाहिए, लेकिन यह होता नहीं है। इसलिए आवासीय डीएलसी से हो।
बड़ा सवाल
पर्यटन विभाग एक ओर कह रहा है कि औद्योगिक डीएलसी होती नहीं है, दूसरी ओर यह भी कह रहा है कि यह आवासीय डीएलसी से कम होती है। इससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
2. गांवों में आवंटन
सरकार ने गांवों में होटल खोलने के लिए जमीन आवंटन अब सीधे ही कृषि डीएलसी दर पर करने का निर्णय किया है। जबकि अब तक जमीन का आवंटन नीलामी से भी किया जाता रहा है।
राजस्व विभाग ने कहा...राजस्व विभाग कृषि डीएलसी दर पर भूमि आवंटन पर तो राजी है, लेकिन तुलनात्मक बोली के साथ। विभाग का कहना है कि राजस्थान औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम १९५९ में २२ मई २०१५ को सरकार ने संशोधन किया था। इसके तहत पर्यटन इकाई को भूमि का आवंटन तुलनात्मक निविदा से किया जाने का नियम है।
पर्यटन विभाग की ये कैसी मंशा...पर्यटन विभाग ने कहा, राजस्थान रिसर्जेंट २०१५ और २२ मई २०१५ से पहले के लंबित प्रकरणों में निविदा प्रक्रिया बिना सीधे आवंटन हो। पर्यटन इकाई नीति २०१५ के चलते 22 मई 2015 को नियम बदले थे। अब औद्योगिक क्षेत्र आवंटन नियम १९५९ के अनुरूप नीति है तो राजस्व विभाग का विरोध गलत।
3. शहरी क्षेत्र में होटल तो...पास की जमीन पर प्रमोटर को प्राथमिकता
यदि किसी औद्योगिक क्षेत्र में होटल प्रोजेक्ट के समीप सरकारी भूमि खाली हो और होटल प्रमोटर उसे लेना चाहता है तो उसे प्राथमिकता मिलेगी। इस पर उद्योग विभाग की डीएलसी दर लगाई जाएगी।
राजस्व विभाग ने नीलामी के लिए जारी किया था परिपत्र
राजस्व विभाग ने प्रदेश में होटलों के लिए जमीन आवंटन के लिए नीलामी प्रक्रिया अपनाने के लिए सभी जिला कलक्टरों को 13 जनवरी 2017 को एक परिपत्र भी जारी किया था। इसमें पर्यटन इकाई के लिए जमीन आरक्षित कर पर्यटन विभाग को सूचित कर इसका आवंटन नीलामी से करने का आदेश दिया गया था।
Published on:
23 Jan 2018 02:28 pm
