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ये है विश्व का एक मात्र मंदिर जहां बंटा हुआ है शिवलिंग, होता है अनोखा चमत्कार

आश्चर्यजनक बात यह है कि शिव-पर्वती के रूप में बंटे यहां के शिवलिंग के दोनो भागों के बीच अपनेआप दूरियां घटती-बढ़ती रहती हैं।

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नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश में बहुत से प्राचीन और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। इस प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है। आज हम आपको एक शिवलिंग के बारे में बताएंगे जो बहुत ही अनोखा है। ये अनोखा शिवलिंग कांगड़ा जिले में स्थित है, यहां के काठगढ़ महादेव मंदिर में शिवलिंग अर्धनारीश्वर रूप में स्थापित किया है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि शिव-पर्वती के रूप में बंटे यहां के शिवलिंग के दोनो भागों के बीच अपनेआप दूरियां घटती-बढ़ती रहती हैं।

घटती-बढ़ती हैं दूरियां का कारण...

आप शायद जानते नहीं होंगे कि इसे विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर माना जाता है, जहां शिवलिंग दो भागों में बंटा हुआ है। मां पार्वती और भगवान शिव के दो विभिन्न रूपों में बंटे शिवलिंग में ग्रहों और नक्षत्रों के परिवर्तन के अनुसार इनके दोनों भागों के मध्य का अंतर घटता-बढ़ता रहता है। रोचक बात तो यह है कि ग्रीष्म ऋतु में यह स्वरूप दो भागों में बंट जाता है और शीत ऋतु में फिर से एक रूप धारण कर लेता है।

कौन था इसका निर्माता?

ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, काठगढ़ महादेव मंदिर का निर्माण सबसे पहले सिकंदर ने करवाया था। इस शिवलिंग से प्रभावित होकर सिकंदर ने टीले पर मंदिर बनाने के लिए यहां की जमीन को समतल करवा कर, यहां मंदिर बनवाया था।

कितनी है ऊंचाई, लम्बाई?
दो भागों में बटा ये शिवलिंग का अंतर ग्रहों एवं नक्षत्रों के मुताबिक घटता-बढ़ता रहता है और शिवरात्रि पर शिवलिंग के दोनों भाग मिल जाते हैं। यहां का शिवलिंग काले-भूरे रंग का है। शिव रूप में पूजे जाते शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 7-8 फीट है और पार्वती के रूप में पूजे जाते शिवलिंग की ऊंचाई लगभग 5-6 फीट है।

शिवरात्रि पर लगता है भव्य मेला...
हर साल शिवरात्रि को यहां तीन दिन का मेला लगता है। शिव और शक्ति के अर्द्धनारीश्वर स्वरुप के संगम के दर्शन करने के लिए यहां कई भक्त आते हैं। इसके अलावा सावन के महीने में भी यहां भक्तों की भीड़ देखी जा सकती है इस मंदिर का अपना खास महत्व है।