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जब से एक टीवी चैनल के धारावाहिक में अशोक सुंदरी नामक कन्या को भगवान शिव की पुत्री बताया गया, लोग चकित हैं। हर कोई शिव- पुत्रों गणेश और कार्तिकेय के बारे में ही जानता है। परन्तु पुत्री अशोक सुंदरी कहां से आई? शिव पुराण का संपूर्ण विचार भगवान शिव के संन्यासी से गृहस्थ बनने की सामाजिक प्रक्रिया का आख्यान है।
इसका अर्थ है शिवजी ने पितृत्व का दायित्व निभाया। वे सांसारिक मोह माया से दूर रहने वाले हैं लेकिन शक्ति ने उनको सांसारिक बंधन में लाने के लिए संकल्पित किया। विष्णु व अन्य देवता भी पार्वती का साथ देते हैं। तमिल शास्त्रों में भगवान विष्णु पार्वती के भाई हैं और ब्रह्मा पिता। ये सब चाहते थे कि शिवजी गृहस्थी बसाएं। संतान का होना इसीलिए आवश्यक माना गया क्योंकि तभी शिवजी की बौद्धिक एवं महान शक्तियों का लाभ जनकल्याण के लिए मिलेगा।
इसलिए पुत्र जन्म लेते हैं। गौर कीजिए, कैसे भगवान शिव के दोनों पुत्र मानवता की सबसे मूलभूत आवश्यकताओं का ख्याल रखते हैं। गणेश जी का संबंध भोजन से है, जिससे हमें भुखमरी का भय नहीं सताता और कार्तिकेय का कल्याण से है। यह दैत्यों से हमारी रक्षा के लिए आवश्यक है।
आशय यह है कि अपने इन दो पुत्रों के माध्यम से शिव जी हमारा संरक्षण करते हैं। शिव जी के दो और पुत्रों का उल्लेख भी मिलता है-अयप्पा और आयनार। ये महान योद्धा देवता दक्षिण भारत में लोकप्रिय है। जब पार्वती ने शिव के नेत्र बंद किए तब उनके स्वेद से असुर अंधक का जन्म हुआ। कहीं-कहीं हनुमानजी के जन्म का भी उद्धरण है।
विद्वानों की दृष्टि से यह 'पुरुष प्रधानता' छिपी नहीं रह सकी इसीलिए लोक परम्पराओं में भगवान शिव की पुत्रियों का भी उल्लेख मिलता है। अशोक सुंदरी की कथा पद्म पुराण में है। उसका जन्म तब हुआ जब भगवान शिव और पार्वती कल्प वृक्ष के पास गए और पार्वती ने कैलाश पर अपना एकाकीपन दूर करने के लिए कन्या की कामना की।

Published on:
18 Jul 2016 09:47 am

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