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ज्योतिष: आसन पर बैठकर ही पूजा करना क्यों माना गया है जरूरी, जानें इसके फायदे और नियम

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को बहुत महत्व दिया गया है और उससे जुड़े कई नियम भी बताए गए हैं। वहीं धार्मिक दृष्टि से बिना आसन बिछाए जमीन पर बैठकर पूजा करने को शुभ नहीं माना जाता।

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ज्योतिष: आसन पर बैठकर ही पूजा करना क्यों माना गया है जरूरी, जानें इसके फायदे और नियम

Puja Asana: हिंदू धर्म में मान्यता है कि सुबह शाम पूजा-पाठ करने से आपके भीतर आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं शास्त्रों में पूजा से जुड़े कई नियम भी बताए गए हैं। माना जाता है कि पूजा के दौरान आपको आसन अवश्य बिछाकर उस पर बैठकर पूजा करनी चाहिए।धार्मिक दृष्टि से बिना आसन बिछाए जमीन पर बैठकर पूजा करने को शुभ नहीं माना जाता। तो आइए जानते हैं पूजा के दौरान आसन पर बैठकर पूजा करना क्यों जरूरी माना गया है और इससे जुड़े नियम...

आसन पर बैठकर पूजा करने का महत्व

शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि भक्तों को कभी भी भगवान की पूजा करते समय पूजा स्थान पर आसन बिछाए बिना जमीन पर बैठकर पूजा नहीं करनी चाहिए। आप पूजा करते समय किसी चटाई, कुशा, कपड़े या पत्ते से बने आसन, लकड़ी की चौकी पर बैठकर ही ईश्वर का ध्यान या पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि कुशा के आसन पर बैठकर पूजा करना सर्वोत्तम होता है। इससे मंत्र की सिद्धि मिलती है।

वहीं इसका वैज्ञानिक मत भी है जिसके अनुसार यदि आप बिना आसान बिछाए जमीन पर बैठकर पूजा, मंत्र जाप या ध्यान करते हैं तो आपके भीतर की सारी सकारात्मक ऊर्जा पृथ्वी में समा जाती है और आपको इसका कोई लाभ प्राप्त नहीं हो पाता। इसलिए हमेशा आसन पर बैठकर ही पूजा करना चाहिए।

नियम

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूजा के आसन को हमेशा साफ सुथरा रखें और इसका इस्तेमाल किसी अन्य काम में न करें।

कभी भी किसी और के आसन का इस्तेमाल ना करें। अपनी पूजा समाप्त होने के बाद अपने पूजा के आसन को यथा स्थान पर रख दें।

आपकी पूजा या मंत्र जाप खत्म होने के बाद एकदम से आसन से न उठें बल्कि आसन से उठने से पहले हाथ में जल लेकर भूमि पर चढ़ाएं और प्रणाम करें।

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