
Shree Raam Ke Vanshaj in Kalyug: क्या प्रभु श्री राम के वंशज आज भी हैं? इस लेख से समझें।
Prabhu Shree Raam Descendant in Kalyug: क्या प्रभु श्री राम के वंशज आज भी मौजूद हैं? यह सवाल अक्सर लोगों के मन-मस्तिष्क में आता है। ज्ञात हो कि, भगवान राम के वंश को सूर्य या इक्ष्वाकु वंश कहा जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम के वंशजों के बारे में वह सत्य बताने जा रहे हैं, जिसका वर्णन शास्त्रों में आता है।
वाल्मीकि रामायण और पुराणों के अनुसार, प्रभु राम के वंश की शुरुआत ब्रह्मा जी के पुत्र मरीचि से हुई। मरीचि के पुत्र कश्यप और कश्यप के पुत्र विवस्वान (सूर्य) हुए। इसी कारण इसे सूर्यवंश कहा जाता है। सूर्य के पुत्र वैवस्वत मनु हुए, जिन्होंने अयोध्या की स्थापना की। इस महान वंश में राजा हरिश्चंद्र, राजा सगर, मां गंगा को धरती पर लाने वाले राजा भगीरथ और राजा दिलीप जैसे तेजस्वी और पराक्रमी राजा हुए। श्री राम के पिता राजा दशरथ इसी श्रृंखला की 62वीं पीढ़ी में हुए।
भगवान श्री राम के दो पुत्र हुए, लव और कुश। शास्त्रों के अनुसार, श्री राम ने अपने राज्य को दो भागों में विभाजित किया।
पुराणों (खासकर विष्णु पुराण और भागवत पुराण) के अनुसार, कुश के वंश में आगे चलकर राजा अतिथि, निषध, नभ, पुण्डरीक और अग्निवर्ण जैसे राजा हुए। इस वंश में सबसे आखिरी में महाभारत काल के दौरान राजा बृहद्वल का नाम आता है, जो कौरवों की ओर से लड़ते हुए अभिमन्यु के हाथों वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
कलियुग में सूर्यवंश के राजा सुमित्र को सूर्य या इक्ष्वाकु वंशावली का अंतिम शासक माना जाता है। भगवान श्री राम के ज्येष्ठ पुत्र कुश का वंश भारतीय इतिहास में बहुत गौरवशाली रहा है। शास्त्रों के अनुसार, कुश ने कुशावती को अपनी राजधानी बनाया और दक्षिण कोसल पर राज किया। विष्णु पुराण और रघुवंशम के अनुसार, कुश के बाद उनके पुत्र अतिथि राजा बने। इस वंशावली में निषध, नल, नभ, पुण्डरीक, क्षेमधन्वा और देवानिक जैसे प्रतापी राजा हुए। महाभारत काल में इसी वंश के राजा बृहद्वल हुए। कलियुग में इस वंश के अंतिम राजा सुमित्र माने जाते हैं। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, राजस्थान के जयपुर का कछवाहा (कुशवाहा) राजवंश खुद को आज भी राजा कुश का सीधा वंशज मानता है।
भगवान राम के दो पुत्र लव और कुश हुए। वंशावली का मुख्य विस्तार कुश के वंश से माना जाता है, जो इक्ष्वाकु वंश को आगे ले गए। प्रभु श्री राम की वंशावली का विष्णु पुराण, भागवत पुराण और रघुवंशम जैसे ग्रंथों में विस्तार से उल्लेख मिलता है। त्रेता युग से लेकर द्वापर युग यानी महाभारत काल और अंत में कलियुग तक का राम जी के वंश का क्रम इस प्रकार है:
इन राजाओं के काल को रामायण और महाभारत के बीच का संधि काल माना जाता है:
माना जाता है, महाभारत के युद्ध के समय श्री राम के वंशज कौरवों की ओर से लड़े थे:
मान्यता है कि महाभारत के बाद इस वंश के राजाओं ने मगध और कौशल क्षेत्र पर शासन जारी रखा:
राजा सुमित्र को इक्ष्वाकु वंश का अंतिम शासक माना जाता है। हालांकि, इसके बाद के और वर्तमान में भी कई राजपरिवार प्रभु श्री राम के वंशज होने का दावा करते हैं।
{अस्वीकृति (Disclaimer): यह लेख शास्त्रों के संदर्भों और मान्यताओं के आधार पर लिखा गया है। हम किसी बात की पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए धार्मिक विशेषज्ञ या इतिहासकार से मिल सकते हैं।}
Updated on:
19 Jan 2026 03:49 pm
Published on:
19 Jan 2026 02:47 pm
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