
baba bajrang das
"इरादे मजबूत हो तो कुछ भी
मुश्किल नहीं।" इस कथन को सच कर दिखाया है बूंदी जिले के संत बजरंग दास ने। जिन्हें
लोग लाल लंगोट वाले बाबा के नाम से जानते हैं। बाबा की कहानी भी "मांझी : द माउंटेन
मैन" फिल्म के मुख्य किरदार बिहार के दशरथ मांझी से कम नहीं। फर्क इतना है कि मांझी
ने मोहब्बत के लिए पहाड़ चीर दिया वहीं बाबा ने लोगों की राह आसान करने परोपकार में
यह काम कर दिखाया।
गेण्डोली में आश्रम बनाकर रहने वाले संत बजरंगदास को इसका
पता चला तो उन्होंने इस राह को सुगम बनाने की ठान ली। मांडपुर व गेण्डोली के बीच
स्थित पहाड़ी पर रास्ता बनाने के सपने को साकार करने के इस प्रयास में ग्रामीणों ने
भी उनका साथ दिया। उन्होंने 80 के दशक में इस काम की शुरूआत की। बाबा के साथ गांव
के लोगों ने कई सालों तक इस पहाड़ी पर श्रमदान कि या और 90 के दशक में एक दिन ऎसा
आया जब इस रास्ते से वाहन गुजरने लगे। ग्रामीणों ने इस मार्ग को "बजरंग घाटी" नाम
दे दिया। चीपल्टा, मांडपुर, गेण्डोली, गूंथा, सास्थी के ग्रामीणों के लिए तो समझो
सपना ही सच हो गया।


Published on:
24 Aug 2015 10:35 am
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