हम सूर्य के द्वारा भी प्राण-शक्ति को खींच सकते हैं। प्रात: काल के समय, सूर्योदय के समय, सूर्य के सामने खड़े होकर यदि हम संकल्प करें कि प्राण-शक्ति का संग्रह हो रहा है, संचय हो रहा है, मस्तिष्क के मार्ग से प्राण-शक्ति का अवतरण हो रहा है। दस-बीस मिनट इस संकल्प को दोहराएं और ध्यानस्थ मुद्रा में खड़े रहें तो अनुभव होगा कि नई शक्ति का संचार हो रहा है, स्फूर्ति का संचार हो रहा है। यदि इस बात को हम ठीक से समझ लें तो शरीर को इतना तैयार कर सकते हैं कि फिर हम आह्वान करेंगे कि बड़ी से बड़ी शक्ति आए और शरीर में अवतरण करे, प्रकट हो, अभिव्यक्त हो।