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विचार मंथन : शक एक ऐसा ज़हर है जो अच्छे रिश्तों को तोड़ देता है, इस ज़हर से हमेशा दूर रहो- भगवान बुद्ध

विचार मंथन : शक एक ऐसा ज़हर है जो अच्छे रिश्तों को तोड़ देता है, इस ज़हर से दूर रहो- भगवान बुद्ध

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भोपाल

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Shyam Kishor

Oct 18, 2018

Daily Thought Vichar Manthan

विचार मंथन : शक एक ऐसा ज़हर है जो अच्छे रिश्तों को तोड़ देता है, इस ज़हर से दूर रहो- भगवान बुद्ध

बिना सेहत के जीवन जीवन नहीं है, बस पीड़ा की एक स्थिति - मौत की छवि है । शक की आदत से भयावह कुछ भी नहीं है । शक लोगों को अलग करता है, यह एक ऐसा ज़हर है जो मित्रता ख़त्म करता है और अच्छे रिश्तों को तोड़ता है, यह एक काँटा है जो चोटिल करता है, एक तलवार है जो वध करती है । सत्य के मार्ग पर चलते हुए कोई दो ही गलतियाँ कर सकता है, पूरा रास्ता ना तय करना, और इसकी शुरआत ही ना करना । किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं, और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं । व्यक्ति अपने क्रोध के लिए दंड नहीं क्रोध के द्वारा दंड पाओगे ।

घृणा घृणा से नहीं प्रेम से ख़त्म होती है, यह शाश्वत सत्य है । आपके पास जो कुछ भी है है उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए, और ना ही दूसरों से इर्ष्या कीजिये, जो दूसरों से इर्ष्या करता है उसे मन की शांति नहीं मिलती । हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं, मैं कभी नहीं देखता कि क्या किया जा चुका है, मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है । जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती, मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता । एक जग बूँद-बूँद कर के भरता है, इसलिए अपने मोक्ष के लिए खुद ही प्रयत्न करें, दूसरों पर निर्भर ना रहे ।


क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकडे रहने के सामान है; इसमें आप ही जलते हैं । अतीत पे ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पे केन्द्रित करो । तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छुप सकती, सूरज, चंद्रमा और सत्य । सभी बुरे कार्य मन के कारण उत्पन्न होते हैं, अगर मन परिवर्तित हो जाये तो क्या अनैतिक कार्य रह सकते हैं ? हजारों खोखले शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है जो मन में शांति लेकर आये ।

चाहे आप जितने पवित्र शब्द पढ़ लें या बोल लें, वो आपका क्या भला करेंगे जब तक आप उन्हें स्वयं उपयोग में नहीं लाते ? किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से अधिक डरना चाहिए, जानवर तो बस आपके शरीर को नुक्सान पहुंचा सकता है, पर एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को नुक्सान पहुंचा सकता है । वह जो पचास लोगों से प्रेम करता है उसके पचास संकट हैं, वो जो किसी से प्रेम नहीं करता उसके एक भी संकट नहीं है । स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफ़ादारी सबसे बड़ा सम्बन्ध है, इन्हें संभालकर रखे ।