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विचार मंथन : ऐसे थे भारत मां के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी

विचार मंथन : ऐसे थे भारत मां के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी  

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भोपाल

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Shyam Kishor

Mar 22, 2019

daily thought

विचार मंथन : ऐसे थे भारत मां के वीर सपूत छत्रपति शिवाजी

भारत के वीर सपूतों में से एक हिंदू हृदय सम्राट, मराठा गौरव छत्रपति शिवाजी न सिर्फ एक महान शासक थे बल्कि दयालु योद्धा भी थे । शिवाजी पिता शाहजी और माता जीजाबाई के पुत्र थे । उनका जन्म महाराष्ट राज्य के पुणे के पास स्थित शिवनेरी में हुआ था । शिवाजी एक सेक्युलर शासक थे और वे सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करते थे । उनकी सेना में मुस्लिम बड़े पद पर मौजूद थे, इब्राहिम खान और दौलत खान उनकी नौसेना के खास पदों पर थे, सिद्दी इब्राहिम उनकी सेना के तोपखानों का प्रमुख था । शिवाजी ने अपने सैनिकों की तादाद को 2 हजार से बढ़ाकर 10 हजार किया था, भारतीय शासकों में वो पहले ऐसे थे जिसने नौसेना की अहमियत को समझा । उन्होंने सिंधुगढ़ और विजयदुर्ग में अपने नौसेना के किले तैयार किए, रत्नागिरी में उन्होंने अपने जहाजों को सही करने के लिए दुर्ग तैयार किया था ।

उनकी सेना पहली ऐसी थी जिसमें गुरिल्ला युद्ध का जमकर इस्तेमाल किया गया, जमीनी युद्ध में शिवाजी को महारत हासिल थी, जिसका फायदा उन्हें दुश्मनों से लड़ने में मिला, पेशेवर सेना तैयार करने वाले वो पहले शासक थे । धार्मिक हिंदू के साथ दूसरे धर्मों का भी सम्मान करते थे, संस्कृत और हिंदू राजनीतिक परंपराओं का विस्तार चाहते थे ।

शिवाजी ने 1657 तक मुगलों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध कायम रखे थे, यहां तक कि बीजापुर जीतने में शिवाजी ने औरंगजेब की मदद भी की लेकिन शर्त ये थी कि बीजापुर के गांव और किले मराठा साम्राज्य के तहत रहे. दोनों के बीच मार्च 1657 के बीच तल्खी शुरू हुई और दोनों के बीच ऐसी कई लड़ाईयां हुईं जिनका कोई हल नहीं निकला । शिवाजी को एक दयालु शासक के तौर पर भी याद किया जाता है ।