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विचार मंथन : मुस्कान तथा आह्लाद थकान की दवा है और विनोद इनका जनक- महात्मा गांधी

गम्भीर न रहें, प्रसन्न रहना सीखें- महात्मा गांधी

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भोपाल

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Shyam Kishor

May 22, 2019

daily thought

विचार मंथन : मुस्कान तथा आह्लाद थकान की दवा है और विनोद इनका जनक- महात्मा गांधी

मुस्कान तथा आह्लाद थकान की दवा है

महात्मा गांधी कहा करते थे—‘यदि कोई मुझसे विनोद प्रियता छीन ले तो मैं उसी दिन पागल हो जाऊंगा।’ मुस्कान तथा आह्लाद थकान की दवा है विनोद इनका जनक है। विनोद प्रियता अधिकांश महापुरुषों का गुण रही है। गांधीजी के जीवन का तो यह अनिवार्य पहलू था। कहते हैं महात्मा गांधी कभी-कभी तो बड़ी से समस्याएं भी हंसी मजाक में सुलझा देते थे, और देखने वाले गांधी जी का मुंह ताकते रह जाते थे। गांधी जी हमेशा कहते थे गम्भीर ही न रहें, प्रसन्न रहना भी सीखें।

महात्मा गांधी का चमत्कार

कलकत्ता में गांधीजी ने खादी प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा— ‘आज जो भी खादी खरीदेगा उसका कैशमीमो मैं बनाऊंगा।’ देखते ही देखते खरीददारों की भीड़ एकत्रित हो गई। थोड़ी सी देर में ढाई हजार रुपये की खादी बिक गई। जब आचार्य कृपलानी ने महात्मा गांधी का यह चमत्कार देखा तो मजाक में कह उठे—‘लेना-देना कुछ नहीं बनिये ने ढाई हजार रुपये मार लिये।’ गांधीजी कब पीछे रहने वाले थे, चट बोल पड़े— ‘यह काम मेरे जैसे बनिये ही कर सकते हैं, प्रोफेसर नहीं।’

आधा सेर बकरी का दूध

बात 9 अगस्त सन् 1942 की है जब प्रातःकाल पुलिस कमिश्नर महात्मा गांधी को गिरफ्तार करने पहुंचा, उन्हें ले जाते हुए पुलिस कमिश्नर ने पास खड़े घनश्यामदास बिड़ला से कहा— ‘गांधीजी के लिए आधा सेर बकरी का दूध दिलवा दीजिये।’ बिड़लाजी ने बापू से पूछा— ‘ये लोग आपकी बकरी का दूध मांगते हैं।’ महात्मा गाधी ने हंसते हुए कहा— ‘चार आने धरा लो और दूध दे दो।’

रेल के तीसरे दर्जे में सफर

एक बार एक अंग्रेज पत्रकार ने गांधीजी से पूछा— ‘आप देश के महान नेता होकर भी हमेशा रेल के तीसरे दर्जे में ही सफर क्यों करते हैं?’ बापू ने उसी क्षण उत्तर दिया— ‘इसलिए कि रेल में कोई चौथा दरजा नहीं है।’ पत्रकार यह उत्तर सुनकर सकपका गया।

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