विचार मंथन : गायत्री मंत्र चारों वेदों का अकेला ऐसा मंत्र है जो समस्त आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है- आचार्य श्रीराम शर्मा

विचार मंथन : गायत्री मंत्र चारों वेदों का अकेला ऐसा मंत्र है जो समस्त आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है- आचार्य श्रीराम शर्मा

श्रद्धापूर्वक गायत्री की साधना करने वाले की बड़ी से बड़ी आपत्तियां, विपत्तियां कट जाती है - आचार्य श्रीराम शर्मा

निस्संदेह मन्त्रों में बहुत बड़ा बल मौजूद है और यदि कोई उनका ठीक ठीक उपयोग जान ले तो अपनी और दूसरों की बड़ी सेवा कर सकता है। गोस्वामी तुलसीदास जी का कथन है कि-

मंत्र परम लघु जासुबस विधि हरिहर सुर सर्व।
महामत्त गजरात कहं बस करि अंकुश खर्व॥

 

गायत्री मन्त्र के गर्भ से ही चारों वेद उत्पन्न हुए

यों तो बहुत से मन्त्र हैं। उनके सिद्ध करने और प्रयोग करने के विधान अलग अलग हैं और फल भी अलग अलग हैं। परन्तु एक मंत्र ऐसा है जो सम्पूर्ण मन्त्रों की आवश्यकता को अकेला ही पूरा करने में समर्थ है। यह गायत्री मन्त्र है। गायत्री मन्त्र ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद चारों वेदों में है। इसके अतिरिक्त और कोई ऐसा मन्त्र नहीं है जो चारों वेदों में पाया जाता हो। गायत्री वास्तव में वेद की माता है। तत्वदर्शी महात्माओं का कहना है कि गायत्री मन्त्र के आधार पर वेदों का निर्माण हुआ है, इसी महामन्त्र के गर्भ में से चारों वेद उत्पन्न हुए हैं। वेदों के मन्त्र दृष्टा ऋषियों ने जो प्रकाश प्राप्त किया है वह गायत्री से प्राप्त किया है।

 

गायत्री जयंती विशेष 12 जून : महिमा मां गायत्री की, गायत्री महामंत्र से ऐसे हुई सृष्टि की रचना

 

परमात्मा से सद्बुद्धि की याचना

गायत्री मन्त्र का अर्थ इतना गूढ़ गंभीर और अपरिमित है कि उसके एक एक अक्षर का अर्थ करने में एक एक ग्रन्थ लिखा जा सकता है। आध्यात्मिक, बौद्धिक, शारीरिक, सांसारिक, ऐतिहासिक, अनेक दिशाओं में उसका एक एक अक्षर अनेक प्रकार के पथ प्रदर्शन करता है। वह सब गूढ़ रहस्य यहां इन थोड़ी सी पंक्तियों के छोटे से लेख में लिखा नहीं जा सकता। यहां तो पाठकों को गायत्री का प्रचलित, स्थूल और सर्वोपयोगी भावार्थ यह समझ लेना चाहिए कि-तेजस्वी परमात्मा से सद्बुद्धि की याचना इस मन्त्र में की गई है।

 

पांच मुखों वाली मां गायत्री का अद्भूत रहस्य

 

विपत्तियों से बाहर निकाल देता है गायत्री मंत्र का जप

श्रद्धापूर्वक इस मन्त्र की धारणा करने पर मनुष्य तेजस्वी और विवेकशील बनता है। गायत्री माता अपने प्रिय पुत्रों को तेज और बुद्धि का प्रसाद अपने सहज स्नेह वश प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त अनेक आपत्तियों का निवारण करने की शक्ति गायत्री माता में है। कोई व्यक्ति कैसी ही विपत्ति में फंसा हुआ हो यदि श्रद्धापूर्वक गायत्री की साधना करे तो उसकी आपत्तियां कट जाती हैं और जो कार्य बहुत कठिन तथा असंभव प्रतीत होते थे वे सहज और सरल हो जाते हैं।

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