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Shani Pradosh Vrat June 2026: जानिए व्रत की सही विधि, नियम और उपवास के दौरान खान-पान की सावधानियां

Shani Pradosh Vrat 2026: जून महीने का आखिरी प्रदोष व्रत शनि देव और भगवान शिव की कृपा पाने के लिए बेहद खास है। जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा नियम और व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं।"
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भारत

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Manoj Vashisth

Jun 26, 2026

Shani Pradosh Vrat benefits

Pradosh Vrat Puja Vidhi and Timing : शनि प्रदोष व्रत की पूजा विधि, कथा हिंदी में (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Pradosh Vrat Puja Vidhi and Timing: जून 2026 में साल का सबसे बड़ा शनि प्रदोष व्रत(Shani Pradosh Vrat 2026) 27 जून, शनिवार को रखा जाएगा। भगवान शिव और शनिदेव की विशेष कृपा दिलाने वाली यह तिथि भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा से न केवल महादेव प्रसन्न होते हैं, बल्कि कुंडली के गंभीर दोष, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव भी शांत होता है। यदि आप भी इस दिन उपवास रख रहे हैं, तो प्रदोष काल पूजा का शुभ समय, पूजा विधि, नियम और उपवास के दौरान खान-पान से जुड़ी सावधानियों की सही जानकारी होना बेहद जरूरी है।

प्रदोष काल: इस समय की पूजा देगी दोगुना फल

प्रदोष काल की पूजा का असर दोगुना माना जाता है। शाम का वह वक्त सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद शिव की आराधना के लिए सबसे अच्छा है। कहा जाता है, इसी गोधूलि बेला में महादेव कैलाश पर अपनी रजत भवन में नृत्य करते हैं, और प्रसन्न रहते हैं।

पूजा क्या और कैसे करनी चाहिए, इसकी विधि भी याद रखिए

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ कपड़े पहनें और पूरे दिन निराहार या फलाहार व्रत का संकल्प लें। शाम को दोबारा स्नान करें, साफ कपड़े पहनें, फिर शिवलिंग पर पंचामृत दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर से अभिषेक करें। महादेव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत, सफेद चंदन, और फूल चढ़ाएं; माता पार्वती को सुहाग की चीजें अर्पित करें। शनिवार का दिन है, तो शिव पूजा के बाद सरसों के तेल का दीपक शिवलिंग या शनिदेव के पास जरूर जलाएं। शनि चालीसा और प्रदोष कथा का पाठ करना फायदेमंद है।

खान-पान के कड़े नियम: एक चूक से खंडित हो सकता है व्रत

पूरे दिन अनाज गेंहू, चावल, दाल नहीं चलेगा। रोटी, पूरी, परांठे से तौबा। और जब तक शिवलिंग पर दूध या दही न अर्पित किया हो, तब तक खुद दूध या चाय न पिएं। ताजे फलों का जूस ले सकते हैं। शाम की मुख्य पूजा के बाद फलाहार (फल, मेवा, सेंधा नमक वाली चीजें) खाना ठीक है। अगर तबियत साथ नहीं दे रही, तो शाम की पूजा के बाद एक टाइम सात्विक भोजन कर सकते हैं। घर का माहौल भी शुद्ध रखा जाए मांस, शराब, लहसुन, प्याज जैसी तामसिक चीजें दूर रहें।

पौराणिक कथा: जब एक व्रत से वापस मिल गया खोया हुआ राज्य

एक गरीब ब्राह्मण विधवा भिक्षा मांगकर अपने बेटे को पालती थी। एक दिन नदी किनारे उसे विदर्भ देश का घायल राजकुमार मिला, जिसके माता-पिता शत्रुओं के हाथों मारे जा चुके थे। महिला ने उसे शरण दी। फिर ऋषि शांडिल्य के कहने पर दोनों ने शनि प्रदोष व्रत किया। इसका असर इतना चमत्कारी था कि राजकुमार को एक शक्तिशाली राजा की मदद मिली, शत्रुओं को हराया और अपना खोया राज्य वापस पाया। ब्राह्मण महिला का परिवार भी हमेशा के लिए दुख से मुक्त हो गया।

शनि दोष शांति के विशेष उपाय

शनि प्रदोष के दिन काले तिल, काले कपड़े या उड़द की दाल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किसी लाचार या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करने से शनिदेव बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं और कुंडली के क्रूर ग्रहों का प्रभाव शुभ फलों में बदल जाता है।

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