कथा-
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के अंत में देवों के वैद्य धन्वंतरी जब अमृत कलश लेकर प्रकट हुए तो असुरों ने इस अमृत कलश को उनसे छीन लिया और फिर आपस में ही अमृतपान के लिए लड़ने लगे। असुरों की इस छीना झपटी को देखते हुए देवताओं को चिंता हो गई कि कहीं अमृत कलश नष्ट ना हो जाए और कोई असुर इसका इस अमृत का पान करके अमरता ना प्राप्त कर ले। भगवान विष्णु भी इस दृश्य को देख रहे थे।