
कई बार देखने में आता है कि किसी व्यक्ति द्वारा पूर्ण रूप से किसी खास स्थिति या चीज को पाने के लिए समस्त प्रयास किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उस व्यक्ति को कार्य में सफलता प्राप्त नहीं होती है। इसका कारण जहां किसी प्रकार का दोष हो सकता है तो वहीं इसका एक अन्य कारण उसके भाग्य के सुसुप्त अवस्था में होना भी माना जाता है।
ऐसे में जानकारों की मानें तो सामान्य रूप से भाग्य को जागृत करने या किसी अन्य विषय जैसे वंशवृद्धि आदि को लेकर ज्योतिष में तमाम तरह के उपायों की बात सामने आती है। वहीं इस संबंध में ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि एक विशेष उपाय इस सभी स्थितियों को खासतौर से सुधारने का कार्य करता है।
इस उपाय के तहत रवि मूल नक्षत्र के दिन ब्रह्रममुहूर्त में स्नानादि से निवृत होने के पश्चात जातक को लाल वस्त्र धारण कर आटे के 121 दीपक जो घी के हों, उनका सूर्यदेव को दीपदान करें, जिसके बाद सूर्यदेव को सुगंधित जल से अघ्र्य दें। अब एक लाल आसन पर बैठकर 'ऊॅं ह्रां हिरण्यगर्भाय नम:' मंत्र का ग्यारह माला जप करें। यहां ध्यान रखें कि दीपदान केवल एक दिन करना है, जबकि इसके बाद हर रोज सूर्य को अध्र्य देने के अलावा इस मंत्र का जप करना है।
माना जाता है कि इस उपाय से न केवल सुप्त भाग्य जाग जाता है, बल्कि यह उपाय वंशवृद्धि में भी कारगर सिद्ध होता है। दरअसल योतिष शास्त्र के अनुसार, नक्षत्र हमारे जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में जहां कुछ नक्षत्रों को लोगों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। तो वहीं इन नक्षत्रों की मदद के फलस्वरूप ही कई जातकों का जीवन सुख-सुविधाओं से भरपूर होता है और इन्हें घर में धन की भी कभी कमी नहीं होती है।
सूर्य और भाग्य का जुड़ाव-
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का संबंध पिता से माना गया है। ऐसे में मान्यता है कि अपने भाग्य को चमकाने के लिए जातक को हर रोज सूर्य को जल देना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से नौकरी और बिजनस संबंधित समस्याएं खत्म होती हैं। वहीं ये भी माना जाता है कि सूर्य को अनुकूल बनाने के लिए नियमित जल देने के साथ आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी किया जाना चाहिए, साथ ही इससे हृदय पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा हृदय रोग की आशंका भी कम हो जाती है।
Published on:
24 Aug 2023 03:17 pm
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