scriptIndian Spiritual Legacy: Avatar of shri hanumanji at kenchi dham | हनुमान जन्मोत्सव : हनुमान जी का ये अवतार! जिनका आशीर्वाद लेने देश से ही नहीं पूरी दुनिया से आते हैं लोग | Patrika News

हनुमान जन्मोत्सव : हनुमान जी का ये अवतार! जिनका आशीर्वाद लेने देश से ही नहीं पूरी दुनिया से आते हैं लोग

अपने पैर किसी को नहीं छूने देते बाबा नीम करौली neem karoli baba ...

भोपाल

Published: April 08, 2020 12:06:48 am

हनुमान जन्मोत्सव इस साल आज यानि 8 अप्रैल 2020, बुधवार को मनाया जाना है। ऐसे में आज हम आपको देश में बने हनुमान मंदिरों की जगह श्रीराम के एक अन्नय भक्त के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें उनके भक्त हनुमान का ही अवतार मानते हैं।
Indian Spiritual Legacy: Avatar of shri hanumanji at kenchi dham
Hanuman Janmotsav at KAINCHI DHAM: Indian Spiritual Legacy Neem karoli baba is an Avatar of shri hanumanji
मानें भी क्यों न उन्होंने कई ऐसे चमत्कार दिखाए कि देश में ही नहीं विदेशों से तक लोग अपनी खाली झोली लेकर पहुंचा और उन्होंने देखते ही देखते इन सभी की झोली भर दी।
दरअसल हम बात कर रहे हैं हनुमान जी के अवतार के रूप में प्रसिद्ध बाबा नीम neem karoli baba करौली की, कुछ लोग इन्हें नीब करौरी भी कहते हैं... जी हां, देवभूमि devbhoomi उत्तरांचल के कुमाउं क्षेत्र में बने कैंची धाम की, इस जगह को लेकर मान्यता है कि यह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी मुराद लेकर जाए तो वह खाली हाथ नहीं लौटता।
इस धाम में बाबा नीम करौली को भगवान हनुमान का अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि बाबा नीब करौली को भगवान हनुमान की उपासना करने के बाद अनेक चमत्कारिक सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। लेकिन बाबा बेहद साधारण तरीके से रहते थे और अपने पैर किसी को नहीं छूने देते थे। कहते हैं बाबा हमेशा ही राम नाम का स्मरण करते रहते थे।
MUST READ : श्रीहनुमान जन्मोत्सव-ऐसे करें बजरंगबली को प्रसन्न, आपकी रक्षा के साथ ही पूरा होगा मनचाहा काम

https://m.patrika.com/amp-news/festivals/hanuman-janmotsva-and-shri-ram-rakshasrota-relations-5977802/बाबा नीम करौली neem karoli baba महाराज के देश-दुनिया में 108 आश्रम हैं। इन आश्रमों में सबसे बड़ा कैंची धाम और अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी स्थित टाउस आश्रम है।
चमत्कारों से भरा है बाबा का धाम
बाबा नीम करौली धाम पर कई चमत्कारी कथाएं विख्यात है। जिसमें से एक भंडारे की भी है। जनश्रुतियों के अनुसार, एक बार भंडारे के दौरान कैंची दाम kainchi dham ashram में घी की कमी पड़ गई थी। बाबा जी के आदेश पर नीचे बहती नदी से कनस्तर में चल भरकर लाया गया। उसे प्रसाद बनाने के लिए जब उपयोग किया गया। तब उस कनस्तर में पानी घी में बदल गया।
इतना ही नहीं, माना जाता है कि बाबा नीब करौरी neem karoli babaअपने भक्तों से बहुत प्यार करते थे। इसलिए एक बार अपने भक्तों को धूप से बचाने के लिए बाबा ने बादल की छतरी बनाकर, उसे उसकी मंजिल तक पहुंचवाया।
ऐसे न जाने कितने किस्से बाबा और उनके पावन धाम से जुड़े हुए हैं, जिन्हें सुनकर लोग यहां पर खिंचे चले आते हैं। इस तरह एक नहीं अनेक कथाएं जुड़ी हुई है बाबा नीम करौली महाराज से। neem karoli baba नीम करौली बाबा kainchi dham ashram को कैंची धाम बहुत प्रिय था। प्राय: हर गर्मियों में वे यहीं आकर निवास करते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। इस मन्दिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियां भी हैं।
MUST READ : वैशाख माह में ऐसे पाएं भगवान शिव की कृपा, जानें प्रसन्न करने के उपाय

https://m.patrika.com/amp-news/dharma-karma/vaishakh-month-starts-from-08-april-2020-gets-lord-shiv-blessings-5976984/भक्तजनों की माने तो बाबा की कृपा से सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। यही कारण है कि बाबा के बनाए सारे मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। नीम करौली धाम को बनाने के संबंध में कई रोचक कथाएं प्रचलित हैं।
बताया जाता है कि 1962 में जब बाबा ने यहां की जमीन पर अपने कदम रखे थे तो जनमानस को अपने चमत्कारों से आश्चर्यचकित कर दिया था। एक कथा के अनुसार के अनुसार 15 जून को आयोजित, विशाल भंडारे के दौरान घी कम पड़ गया था। तब बाबा के आदेश पर पास की नदी का पानी कनस्तरों में भरकर प्रसाद बनाया जाने लगा।
प्रसाद में डालते ही पानी अपने आप आप घी में बदल गया। इस चमत्कार से भक्त जन नतमस्तक हो गए। तभी से उनकी आस्था और विश्वास नीम करौली बाबा के प्रति बना है। नीम करोली बाबा का यह आश्रम आधुनिक जमाने का धाम है। यहां मुख्य तौर पर भगवान हनुमान जी की पूजा होती है। इस जगह का नाम कैची यहां सड़क पर दो बड़े जबरदस्त हेयरपिन बैंड (मोड़) के नाम पर पड़ा है।
वहीं एक बार बाबा नीम करौली महाराज ने अपने भक्त को गर्मी की तपती धूप में बचाने के लिए उसे बादल की छतरी बनाकर, उसे उसकी मंजिल तक पहुंचाया। बाबा नीब करौरी को हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं।
baba neem karoli03वहीं एक चमत्कारिक कथा के अनुसार माता सिद्धि व तुलाराम शाह के साथ बाबा नीम करौली महाराज किसी वाहन से जनपद अल्मोड़ा के रानीखेत नामक स्थान से नैनीताल को आ रहे थे, तो अचानक वे कैंची धाम के पास उतर गए। इस बीच उन्होंने तुलाराम जी को बताया कि श्यामलाल अच्छा आदमी था, उन्हें यह बात अच्छी नहीं लगी, क्योंकि श्यामलाल जी उनके समधी थे। भाषा में 'था' शब्द के उपयोग से वे बेरुखे हो गए।
खैर किसी तरह मन को काबू में रखकर वे अपने गंतव्य स्थल को चल दिए। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि उनके समधी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। कितना अलौकिक दिव्य चमत्कार था बाबा नीम किरौली महाराज का कि उन्होंने दूर घटित घटना को बैठे-बैठे जान लिया इस तरह की अनेक चमत्कारिक घटनाएं बाबा नीम करौली महाराज जी से जुड़ी हुई है।
इसी तरह 15 जून 1991 को घटी एक चमत्कारिक घटना के अनुसार कैंची धाम में आयोजित भक्तजनों की विशाल भीड़ में बाबा ने बैठे-बैठे इसी तरह निदान करवाया कि जिसे यातायात पुलिसकर्मी घंटो से नहीं करवा पाए। थक-हार कर उन्होंने बाबा जी की शरण ली। आख़िरकार उनकी समस्याओं का निदान हुआ। यह घटना आज भी खास चर्चाओं में रहती है।
युधिष्ठिर को दिया प्राण दान...
इसके अलावा एक ओर कथा जो प्रसिद्ध है उसके अनुसार नीम करोली बाबा जी के भगत ओंकार सिंह जी के पुत्र ,युधिष्ठिर सिंह के साथ बाबा नीम करोली उसी की गाड़ी में भूमियाधार आये थे। रात्रि विश्राम के बाद सुबह ब्रम्ह मुहूर्त के अंधेरे में ही युधिष्ठिर और उमादत्त शुक्ल मंदिर से बाहर आ गए कि अंधेरे-अंधेरे में ही शौचादि से निपट लें। कुछ दूर पर एक चट्टान पर से अपना कोट जैसे ही उठाना चाहा कि उन्हें एक काले नाग(कोबरा) ने डस लिया।
baba neem karoli02युधिष्ठिर चिल्लाते हुए मंदिर की तरफ भागे कि," साँप ने काट लिया ", पर आधे मार्ग में ही अचेत होकर गिर पड़े । कुछ ही देर में उनका सारा शरीर विष के प्रभाव से काला पड़ गया और उन्हें अन्य लोग मंदिर के पास ले आये । वे सब प्रकार से मृत हो चुके थे।
उधर नीम करोली बाबा चिल्लाते रहे कि ,"युधिष्ठिर मर गया है। इसके बाप को खबर भेज दो"। कुछ देर बाद उन्होनें बृहमचारी बाबा को डाँट लगाई कि ,"देखते क्या हो । इसे खूब तेज चाय पिलाओ"। ऐसा ही करने का प्रयास किया गया पर मृत(?) को कैसे पिलाई जाती चाय ? तब बाबा जी स्वयं आये ,युधिष्ठिर को डाँट कर कहा ," उठ चाय पी", और अपने हाथो से उसे उठाकर , बैठाकर चाय पिला दी। उसके बाद उसको आज्ञा दी कि," उठो गाड़ी पर बैठो । हमें रानीखेत ले जाओ ।"
सभी आश्चर्य चकित हो यह तमाशा देखते रहे। बाबा जी स्वयं उसके बगल में बैठ गए और युधिष्ठिर गाड़ी चलाने लगे !!भवाली पार हो गई ।उधर बाबा जी और तेज, और तेज कहते रहे तथा जब भी युधिष्ठिर विष के नशे मे झूमने सोने लगते तभी महाराज जी उनको अपने पाँवों की ठोकर से सचेत कर देते कहते हुए कि,"सोता क्यों है ?" कैंची भी निकल गई ,गरमपानी ,खैरना आदि पार हो गए इसी प्रकार ,और फिर पुल पार रानीखेत रोड़ पर गाड़ी दौड़ चली।
MUST READ : ये हैं न्याय के देवता, भक्त मन्नत के लिए भेजते हैं चिट्ठियां और चढ़ाते हैं घंटी व घंटे

https://m.patrika.com/amp-news/temples/god-of-justice-temple-is-here-at-devbhoomi-in-india-5965810/रानीखेत पहुंचकर महाराज जी ने हुक्म दिया कि, "वापिस चलो"। बाबा लौटते वक़्त कुछ देर कैंची में रूके। वे उतर कर अन्यत्र चले गये। तब तक युधिष्ठिर यथेष्ट रूप से सचेत हो चुके थे। उन्हें भूख भी लग आई । तभी देखा कि गाड़ी की पिछली सीट पर ढेर सारे सेव रखे है!! भरपेट सेव खाये और फिर बाबा जी के आने पर पूर्ण चेतना में भूमियिधार लौट आये। विष का पूरा इलाज हो गया !!
आडंबरों से दूर रहते थे बाबा...
भक्त उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। हालांकि वह आडंबरों से दूर रहते थे। न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला। एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे श्री हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे।
बाबा नीम करौली को कैंची धाम बहुत प्रिय था। अक्सर गर्मियों में वे यहीं आकर रहते थे। बाबा के भक्तों ने इस स्थान पर हनुमान का भव्य मन्दिर बनवाया। उस मन्दिर में हनुमान की मूर्ति के साथ-साथ अन्य देवताओं की मूर्तियां भी हैं। यहां बाबा नीम करौली की भी एक भव्य मूर्ति स्थापित की गयी है। बाबा नीम करौली महाराज के देश-दुनिया में 108 आश्रम हैं। इन आश्रमों में सबसे बड़ा कैंची धाम तथा अमेरिका के न्यू मैक्सिको सिटी स्थित टाउस आश्रम है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सन 1964 में आगरा के पास फिरोजाबाद के गांव अकबरपुर में जन्मे लक्ष्मी नारायण शर्मा (असली नाम) यहां तपस्या करने आए थे। उन्हीं के प्रयासों से इस मंदिर का उद्धार हुआ था। बताया जाता है की फर्रूखाबाद के गांव नीम करौली में उन्होंने कठिन तपस्य़ा की थी जिस कारण वे बाबा नीम करौली कहलाने लगे।
MUST READ : शनिदेव के ये बड़े रहस्य, जो बनते हैं आपकी कुंडली में शुभ व अशुभ के कारण

https://m.patrika.com/amp-news/dharma-karma/shani-dev-effect-in-all-zodiac-signs-and-every-condition-5964101/कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भवाली-अल्मोड़ा/रानीखेत राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे पर स्थित है। 24 मई 1962 को बाबा ने पावन चरण उस भूमि पर रखे, जहां वर्तमान में कैंची मंदिर स्थित है। 15 जून 1964 को मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई और तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मंदिर चारों ओर से ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है और मंदिर में हनुमान जी के अलावा भगवान राम और सीता माता के साथ ही देवी दुर्गा जी के भी छोटे-छोटे मंदिर बने हुए हैं। किन्तु कैंची धाम मुख्य रूप से बाबा नीम करौली और हनुमान जी की महिमा के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां आने पर हर व्यक्ति अपनी सभी समस्याओं के हल प्राप्त कर सकता है।
मंदिर की स्थापना...
कैंची धाम में मंदिर की स्थापना को लेकर कई रोचक कथाए जनमानस में खासी प्रसिद्ध है। नीम किरौली महाराज की अनुपम कृपा से ही इस स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई। कहते है कि 1962 के आस-पास श्री महाराज जी ने यहां की भूमि पर कदम रखा तथा उनके चरणों की आभा पाकर यह भूमि धन्य हुई। जब वे सन् 1962 के लगभग यहां पहुंचे तो उन्होंने अनेक चमत्कारिक लीलाएं रचकर जनमानस को हतप्रभ कर दिया।
इनकी संवर गई थी किस्मत...
फेसबुक और एप्पल के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग व स्टीव जॉब्स को राह दिखाने वाले नीम करौली बाबा पश्चिमी देशों में भारत की विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके आश्रम में जहां न केवल देशवासियों को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को प्रसन्न और खुशहाल बनने का रास्ता मिलता है।
baba neem karoliनीम करौली बाबा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने चमत्कार के कारण जाने जाते हैं। लोकप्रिय लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने 'मिरेकल ऑफ लव' नाम से बाबा पर पुस्तक लिखी है। सिर्फ यही नहीं हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग सहित कई अन्य विदेशी हस्तियां बाबा के भक्त हैं।

बड़ी हस्तियां भी बाबा के आगे झूकी
बाबा के हजारों- लाखों भक्त हैं। लेकिन भक्तों में बाबा के पास सिर्फ आम आदमी ही नहीं आए। इस पावन धाम पर अरबपति से लेकर खरबपतियों ने शीष झुकाया है। जिसका कारण है इस धाम की चमत्कारी शक्तियां। जो पूरी दुनिया में मशहूर है। जिसके चलते सभी लोग यहां खिंचे चले आते है।
बाबा के भक्त और जाने-माने लेखक रिच्रर्ड एलपर्ट ने मिरेकल आफ लव नाम से बाबा पर पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक में बाबा नीब करौरी के चमत्कारों का विस्तार से वर्णन है। इनके अलावा हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के फाउंडर स्टीव जाब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग जैसी बड़ी विदेशी हस्तियां बाबा के भक्त हैं।
नीम करौली को लेकर ये बोले थे जुकरबर्ग...
27 सितंबर 2015 को जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फेसबुक के मुख्यालय में थे और बातों का दौर चल रहा था तो जुकरबर्ग ने कहा था कि जब वे इस कन्फ्यूजन में थे कि फेसबुक को बेचा जाए या नहीं, तब एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने इन्हें भारत के एक मंदिर में जाने की सलाह दी थी। वहीं से इन्हें कंपनी के लिए नया मिशन मिला। जुकरबर्ग ने बताया था कि वे एक महीना भारत में रहे। इस दौरान उस मंदिर में भी गए थे।
वह मंदिर कैंची धाम हनुमान मंदिर ही है, जहां एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने फेसबुक प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को जाने के लिए कहा था। मंदिर को आज नीम करोली बाबा का कैंची धाम नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर के कुछ ट्रस्टी लोग बताते हैं कि " गूगल के पूर्व डायरेक्टर लैरी ब्रिलियंट ने आश्रम में फ़ोन कर यह जानकारी दी थी कि मार्क जुकरबर्ग नाम का एक लड़का कैंची धाम आश्रम में आ रहा है और वह कुछ दिन यहां रुकेगा।" और मार्क जब यहां आये थे तो उनके पास मात्र एक पुस्तक थी। जुकरबर्ग आए तो एक दिन के लिए थे, लेकिन मौसम खराब हो जाने के कारण वह यहां दो दिन रुके थे।
27 सितंबर को सैन होसे में मोदी एप्पल के वर्तमान सीईओ टिम कुक से मिले थे। कुक ने मोदी जी को बताया था कि, "हमारे फाउंडर स्टीव जॉब्स इन्सपिरेशन के लिए भारत गए थे। जॉब्स 1974 में आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में अपने कुछ दोस्तों के साथ नीम करौली बाबा से मिलने भारत आए थे। तब तक बाबा का निधन हो चुका था। लेकिन जॉब्स कुछ दिन आश्रम में ही रुके थे।''
मंदिर अधिकारियों का कहना है कि जूलिया रॉबर्ट्स, डॉक्टर रिचर्ड एल्पेर्ट जो ड्रग एलएसडी के प्रभाव पर रिसर्च करते हैं और मशहूर लेखक डेनियल भी यहां आ चुके हैं।

बाबा के धाम पर महामेला
बाबा के इस धाम पर हर एक बार मेला लगता है। इस दौरान बाबा नीम करौली के हजारों भक्त यहां पहुंचते है। इस साल भी विशाल मेले का अयोजन हुआ है। ये मेला 15 जून को लगने वाला है। इस इस पावन धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है। दरअसल बाबा नीम करौरी में आश्रम की स्थापना 1964 में हुई थी। बाबा नीब करौली 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिल कर यहां आश्रम बनाने का विचार किया था।
यहां 15 जून को इस धाम में विशाल मेले का आयोजन होता है। दरअसल 15 जून को इस पावन धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है। देश-विदेश से हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं। बाबा नीब करौरी ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी।
MUST READ : बजरंगबली के अचूक व प्रभावी मंत्र, जो हर स्थिति में दिलाते हैं जीत

https://m.patrika.com/amp-news/dharma-karma/hanumaan-janmotsav-2020-shubh-muhurat-date-and-timing-with-puja-5971469/कैंची धाम : ऐसे समझें नीम करौली बाबा को...

माना जाता है कि नीम करौली बाबा का जन्म उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में रहने वाले एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
11 वर्ष की उम्र में ही उनका विवाह एक ब्राह्मण कन्या के साथ कर दिया गया था। परन्तु शादी के कुछ समय बाद ही उन्होंने घर छोड़ दिया और साधु बन गए। माना जाता है कि लगभग 17 वर्ष की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी।
घर छोड़ने के लगभग 10 वर्ष बाद उनके पिता को किसी ने उनके बारे में बताया। जिसके बाद उनके पिता ने उन्हें घर लौटने और वैवाहिक जीवन जीने का आदेश दिया। वह तुरंत ही घर लौट आए। कालांतर में उनके दो पुत्र तथा एक पुत्री उत्पन्न हुए। गृहस्थ जीवन के दौरान वह अपने आपको सामाजिक कार्यों में व्यस्त रखा।
1962 के दौरान नीम करौली बाबा ने कैंची गांव में एक चबूतरा बनवाया। जहां पर उन्के साथ पहुंचे संतों ने प्रेमी बाबा और सोमबारी महाराज ने हवन किया।

नीम करौली बाबा हनुमानजी के बहुत बड़े भक्त थे। उन्हें अपने जीवन में लगभग 108 हनुमान मंदिर बनवाए थे। वर्तमान में उनके हिंदुस्तान समेत अमरीका के टैक्सास में भी मंदिर है।
बाबा को वर्ष 1960 के दशक में अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली। उस समय उनके एक अमरीकी भक्त बाबा राम दास ने एक किताब लिखी जिसमें उनका उल्लेख किया गया था। इसके बाद से पश्चिमी देशों से लोग उनके दर्शन और आर्शीवाद लेने के लिए आने लगे।
बाबा ने अपनी समाधि के लिए वृन्दावन की पावन भूमि को चुना। उनकी मृत्यु 10 सितम्बर 1973 को हुई। उनकी याद में आश्रम में उनका मंदिर बना गाया और एक प्रतिमा भी स्थापित की गई।
ऐसे पहुंचे नीम करौली...
यहां आने के लिए काठगोदाम सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है, पन्तनगर निकटतम हवाई अड्डा है और बाकी उत्तराखण्ड रोडवेज की और प्राईवेट टैक्सियांं हल्द्वानी और काठगोदाम से उपलब्ध हैं, हलद्वानी काठगोदाम से जाने वाली राष्टीय राजमार्ग अल्मोड़ा और रानीखेत सड़क पर ही स्थित है।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

ज्योतिष: ऊंची किस्मत लेकर जन्मी होती हैं इन नाम की लड़कियां, लाइफ में खूब कमाती हैं पैसाशनि देव जल्द कर्क, वृश्चिक और मीन वालों को देने वाले हैं बड़ी राहत, ये है वजहताजमहल बनाने वाले कारीगर के वंशज ने खोले कई राजपापी ग्रह राहु 2023 तक 3 राशियों पर रहेगा मेहरबान, हर काम में मिलेगी सफलताजून का महीना इन 4 राशि वालों के लिए हो सकता है शानदार, ग्रह-नक्षत्रों का खूब मिलेगा साथJaya Kishori: शादी को लेकर जया किशोरी को इस बात का है डर, रखी है ये शर्तखुशखबरी: LPG घरेलू गैस सिलेंडर का रेट कम करने का फैसला, जानें कितनी मिलेगी राहतनोट गिनने में लगीं कई मशीनें..नोट ढ़ोते-ढ़ोते छूटे पुलिस के पसीने, जानिए कहां मिला नोटों का ढेर

बड़ी खबरें

भीषण गर्मी : देश में 140 में से 60 बड़े बांधों का पानी घटा, राजस्थान के भी तीन बांधमंकीपॉक्स पर WHO की आपात बैठक में अहम खुलासा: यूरोप में अब तक 100 से अधिक मामलों की पुष्टि, जानिए 10 अपडेटJNU कैंपस में एमसीए की छात्रा से रेप, आरोपी छात्र गिरफ्तारकैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में बोले राहुल गांधी, भारत में ठीक नहीं हालात, BJP ने चारों तरफ केरोसिन छिड़क रखा हैकर्नाटक में बड़ा हादसाः बारातियों से भरी गाड़ी पेड़ से टकराई, 7 की मौत, 10 जख्मीजल्द ही कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू करेगा जेट एयरवेज, DGCA ने दी मंजूरीमाता वैष्णो देवी के प्रमुख पुजारी अमीर चंद का निधन, जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल सहित कई नेताओं ने जताया दुखज्ञानवापी मस्जिद केसः प्रोफेसर रतन लाल की गिरफ्तारी पर हंगामा, DU में छात्रों का प्रदर्शन
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.