12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वेलेंटाइन डे के दिन पड़ रहा है महत्वपूर्ण व्रत, कुंआरी लड़कियां भी रखती हैं उपवास

वेलेंटाइन डे 2023 (valentine day 2023) के दिन हिंदू धर्मावलंबियों का महत्वपूर्ण व्रत पड़ रहा है। इस व्रत को महिलाएं और कुंआरी लड़की रखती हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन कृष्ण अष्टमी को यह जानकी जयंती 2023 व्रत (Janaki Jayanti 2023) रखा जाएगा, जो तिथि इस साल 14 फरवरी यानी वेलेंटाइन डे के दिन पड़ रही है।

2 min read
Google source verification

image

Pravin Pandey

Feb 08, 2023

janaki_jayanti_vrat.jpg

Janaki Jayanti 2023

Janaki Jayanti 2023: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि को माता सीता का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए इस तिथि को सीता जयंती (जानकी जयंती) मनाई जाती है। इस तिथि को सीता अष्टमी नाम से भी जाना जाता है। बिहार राज्य के मिथिला क्षेत्र में इसकी धूम रहती है। इसके अलावा नेपाल में भी इसको लेकर उत्सवी माहौल रहता है। कई जगहों पर रामायण के नाट्य रूपांतरण का भी आयोजन होता है और झांकियां सजाई जाती हैं।


मान्यता है इस दिन माता सीता और भगवान राम की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। जो भक्त जानकी जयंती पर भगवान राम और सीता की उपासना करता है उस भक्त पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। प्रयागराज के आचार्य प्रदीप पाण्डेय के अनुसार जानकी जयंती व्रत सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और कुंआरी लड़कियां मनोवांछित वर की प्राप्ति की कामना से रहती हैं।


जानकी जयंती 2023: दृक पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि की शुरुआत 13 फरवरी सुबह 8.15 बजे से हो रही है, जबकि यह तिथि 14 फरवरी को सुबह 7.40 बजे संपन्न हो रही है। उदया तिथि में जानकी जयंती 14 फरवरी मंगलवार को मनाई जाएगी।

ये भी पढ़ेंः Today Horoscope 9 February: इन पांच राशियों के लिए लाभ का दिन, ये संभलकर रहें


जानकी जयंती पर ऐसे करें पूजा


1. इस दिन सुबह उठकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम और माता सीता को प्रणाम करें।
2. दैनिक क्रिया पूरी कर गंगा में स्नान करें या गंगा स्नान न कर पाएं तो गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें।
3. आचमन कर स्वयं को पवित्रकर, लाल रंग के कपड़े पहनें।
4. पूजा घर में चौकी पर श्रीराम जानकी की तस्वीर रखें।


5. माता को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें, फल, पुष्प, दूर्वा अर्पित करें।
6. पूजा स्थल पर भगवान के निमित्त दीप, धूप जलाएं।
7. आरती कर सुख, समृद्धि की कामना करें और अपनी आकांक्षा ईश्वर के सन्मुख मन में प्रकट करें।
8. दिनभर व्रत रखें और शाम को आरती के बाद फलाहार करें।