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यहां शिवलिंग को माता के रूप में पूजा जाता है, साल में इस खास दिन पर खुलते हैं मंदिर के कपाट

इसमें शिवलिंग की पूजा स्त्रीलिंग के रूप में की जाती है

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Arijita Sen

Mar 04, 2018

Lingai Mata

नई दिल्ली। हमारे देश में जगह-जगह पर मंदिर-मस्जिद देखने को मिल जाती है। प्रत्येक मंदिर के अपने चमत्कार और अपनी मान्यताएं है। एक ऐसे ही मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जो कि झारखंड और छत्तीसगढ़ के दुर्गम इलाकों में स्थित है और ये क्षेत्र अधिकतर नक्सल प्रभावित होते हैं जिसके चलते लोग इस मंदिर के दर्शन को नहीं पहुंच पाते हैं।

एक ऐसा ही मंदिर है लिंगाई माता का मंदिर जो कि इसी क्षेत्र के आलोर गांव के एक गुफा में है। बता दें कि ये शिवजी का मंदिर है जहां शिवलिंग स्थापित हैं लेकिन इस मंदिर के बारे में खास बात ये है कि इसमें शिवलिंग की पूजा स्त्रीलिंग के रूप में की जाती है और इसी कारण इसे लिंगाई माता मंदिर का नाम दिया गया है।

ये मंदिर फरसगांव से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर पश्चिम से बड़ेडोंगर मार्ग पर आलोर गांव में स्थित है। आलोर से लगभग 2 किमलोमीटर उत्तर पश्चिम में एक पहाड़ी है जो कि लिंगई गट्टा लिंगई माता के नाम से प्रसिद्ध है। इस पहाड़ी के ऊपर एक विशाल पत्थर है।

इस पत्थर की बनावट स्तूप-नुमा है। इस पत्थर की बनावट को देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो किसी विशाल पत्थर को कटोरानुमा तराश कर चट्टान के ऊपर उलट कर रख दिया गया है। लिंगाई माता मंदिर के दक्षिण दिशा में एक सुरंग है जो कि इस गुफा का प्रवेश द्वार है।

ये प्रवेश द्वार काफी छोटा है जिस कारण इंसान को या तो लेटकर या फिर बैठकर ही घुसना पड़ता है।अंदर जाने पर चट्टान के बीचों-बीच से शिवलिंग निकला हुआ है। ये शिवलिंग दो फीट का है। यहां के लोगों की मान्यता है कि ये शिवलिंग समय के साथ-साथ बढ़ता जा रहा है।

यहां आने वाले श्रद्धालु संतान प्राप्ति की मन्नत लेकर आते हैंं। साल में केवल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष नवमीं तिथि के बाद आने वाले बुधवार को इस मंदिर के द्वार क ो खोला जाता है।इस दिन मंदिर के बाहर मेले का भी आयोजन किया जाता है।

संतान प्राप्ति की मन्नत मांगने वाले दंपत्ति को भगवान को खीरा चढ़ाना आवश्यक होता है। बता दें कि शिवलिंग के समक्ष दंपत्ति को इस ककड़ी को अपने नाखून से चीरा लगाकर उसे दो टुकड़ों में तोडऩा होता है। मंदिर में पशुबलि और शराब के चढ़ावे पर मनाही है।

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