
mahashivratri puja
Mahashivratri Ashubh Muhurt: बता दें कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने अपने निराकार रूप में सृष्टि रचना की शुरुआत की थी और भगवान शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसके अलावा इसी दिन आदि देव महादेव और आदि शक्ति पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए यह तिथि बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इस दिन भक्त भगवान की पूजा अर्चना करते हैं और व्रत उपवास रखते हैं।
लेकिन यह महाशिवरात्रि बेहद खास है, क्योंकि इस दिन कुछ अशुभ योग बन रहे हैं। अशुभ योग में सच्चा भक्त ही मन को ईश्वर की आराधना में लगा पाएगा, क्योंकि अशुभ योग मन को अशांत और अस्थिर करते हैं। इस तरह इस समय जो भी भक्त मन को प्रभु की पूजा अर्चना में लगा पाएगा, उस पर महादेव आसानी से प्रसन्न हो जाएंगे और उसकी मनोकामना पूरी करेंगे। इसका अर्थ है कि भगवान शिव इस अशुभ समय में भक्त की भक्ति का इम्तिहान लेंगे।
दृक पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी यानी शनि प्रदोष 18 फरवरी रात 8.02 बजे तक है। इसके बाद फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी यानी महाशिवरात्रि शुरू हो जाएगी, जो 19 फऱवरी शाम 4.18 बजे तक रहेगी। इसी समय अशुभ माने जाने वाले आडल योग और भद्राकाल लग रहे हैं। इस अशुभ समय (कठिन समय) जो भी भक्त भगवान की सच्चे मन से पूजा करेगा, उसे आसानी से शिव कृपा प्राप्त होगी।
ये है अशुभ माने जाने वाले योग का समय
आडल योग ः 18 फरवरी 7.06 पीएम से 19 फरवरी 6.50 एएम
भद्राः 18 फरवरी 8.02 पीएम से 19 फरवरी 6.10 एएम
अगले दिन शुभ काम के लिए करें इंतजार
बता दें कि भद्राकाल और आडल योग 19 फरवरी को सुबह भी कुछ घंटे तक है तो इस समय खरीदारी या कोई शुभ काम शुरू करने से पहले इस समय को बीतने का इंतजार कर लेना जरूरी है।
(नोटः यह आकलन दृक पंचांग के आधार पर है, दूसरे पंचांगों में समय में कुछ अंतर हो सकता है)
आडल योगः यह योग शुभ नहीं माना जाता है, कहा जाता है इस योग में शुरू किए गए काम के परिणाम में देरी होतीहै।
Updated on:
10 Feb 2023 06:25 pm
Published on:
10 Feb 2023 06:23 pm
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