
Achchhe Logo Ke Sath Bura kyu Hota hai: अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है, इस लेख से समझिए। (PC: AI)
Why Good People Suffer: संभवतः हर व्यक्ति के मन में जीवन में एक बार तो यह प्रश्न आता है कि अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है? धार्मिक और भगवान के भजन करने वाले भक्तों को क्यों कष्ट सहने पड़ते हैं? भगवान क्यों नहीं उनके सब दुख दूर कर देते? इन्हीं प्रश्नों के जवाब इस आर्टिकल में संत श्री कमल किशोर जी नागर से समझिए।
अक्सर लोग शिकायत करते हैं, "हम तो हमेशा सबका भला करते हैं, फिर हमारे साथ ही बुरा क्यों होता है?" या "भगवान की राह पर चलते हैं, तो परेशानियां क्यों आती हैं?" लेकिन सच तो यह है कि यह मुसीबतें आपका बुरा करने नहीं, बल्कि आपको निखारने आती हैं। कहते हैं, अच्छे लोगों के साथ बुरा भी अच्छे के लिए ही होता है।
संत श्री नागर इसे उदाहरण से समझाते हैं। वे कहते हैं, परीक्षा उसी की होती है, जो पढ़ाई करता है। परीक्षा के दिनों में पसीना और तनाव उसी छात्र को होता है, जिसने पढ़ाई की होती है और जो परीक्षा हॉल में बैठा है। बाहर सड़क पर घूम रहे लोगों को न फेल होने का डर है और न ही पास होने की खुशी। ठीक वैसे ही, जब आप धर्म और सच्चाई के रास्ते पर चलते हैं, तो आप 'ईश्वर की क्लास' के विद्यार्थी बन जाते हैं। अब भगवान आपको टटोलते हैं, निखारते हैं और परीक्षा लेते हैं कि आपकी श्रद्धा कितनी गहरी है। मुसीबतें दरअसल, प्रभु की परीक्षा है। इनसे घबराने की बजाय सहर्ष इनका स्वागत और सामना करना चाहिए।
संत श्री नागर समझाते हैं, ईश्वर हमें भीड़ का हिस्सा नहीं रहने देना चाहता। वह हमें तराश कर हीरा बनाना चाहता है। जो परेशानियां हमारे जीवन में आती हैं, वे दरअसल हमारी कमियों को पहचानने का मौका होती हैं। जैसे एक कुम्हार घड़े को मजबूत बनाने के लिए बाहर से चोट मारता है, वैसे ही ईश्वर हमें कठिन स्थितियों में डालकर अंदर से फौलाद बनाता है।
जब कोई कीमती जेवर पहनकर निकलता है, तो चोरों की नजर उस पर जरूर पड़ती है। इसी तरह, जब आप पुण्य कर्म करते हैं, तो नकारात्मक शक्तियां आपको डगमगाने की कोशिश करने लगती हैं। इस दौरान यदि आप डर कर पीछे हट जाते हैं, तो आप परीक्षा में नाकामयाब हो जाते हैं। वहीं अगर आप डटे रहे, तो यही कठिन समय आपको सफलता और शांति के उस शिखर पर ले जाएगा, जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी।
धर्म के मार्ग पर आने वाली कठिनाइयां 'करम फूटना' नहीं, बल्कि 'किस्मत चमकना' होती हैं। संत श्री कहते हैं, बिखरने का साहस रखेंगे, तभी कुंदन बनकर निखरेंगे। धर्म के मार्ग पर आने वाली चुनौतियां वास्तव में ईश्वर की परीक्षाएं होती हैं, जो हमें कमजोर करने नहीं बल्कि और अधिक मजबूत बनाने आती हैं।
Updated on:
26 Jan 2026 05:52 pm
Published on:
26 Jan 2026 05:20 pm

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