
Premanand ji Mahraj Pravachan: जो किस्मत में नहीं वो कैसे मिलता है?: प्रेमानंद जी (छविः भजनमार्ग)
Premanand ji Maharaj Latest Pravachan Video in Hindi: सबके चहीते संत श्री प्रेमानंद महाराज जी ने अपने सत्संग में एक बड़ा उपाय बताया है। महाराज जी के अनुसार उस उपाय को अपनाकर आप वो चीज भी हासिल कर सकते हैं, जो आपके किस्मत में नहीं है। प्रेमानंद जी से एक भक्त ने पूछा, "महाराज जी, अगर कोई चीज हमें बहुत पसंद हो, लेकिन वह हमारे भाग्य में न हो, तो क्या वह हमें मिल सकती है? क्या हम अपनी किस्मत बदल सकते हैं?" इस पर महाराज जी ने चमत्कारी उपाय बताया।
महाराज जी कहते हैं, अगर हम केवल हाथ पर हाथ रखकर बैठें रहेंगे, तो हमें वही मिलेगा जो हमारे भाग्य यानी प्रारब्ध में पहले से लिखा है...लेकिन मनुष्य जन्म केवल पुराने कर्मों को भोगने के लिए नहीं मिला है। हम यहां अपना नया भाग्य लिखने आए हैं। अगर आप अपनी मनपसंद चीज पाना चाहते हैं, तो आपको 'भजन' और 'तप' का दामन थामना होगा। कलयुग में सबसे अधिक फायदा केवल यही दे सकते हैं। भजन और तप केवल भौतिक सुख नहीं देते, बल्कि आपकी आध्यात्मिक उन्नति में भी करते हैं।
किस्मत बदलने का अचूक रास्ता बताते हुए महाराज जी ने कहा कि तपस्या की शुरुआत व्रत से करें। अगर आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते, तो महीने में पड़ने वाली दोनों एकादशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करें। एकादशी का उपवास और भगवान का नाम जप करने में इतनी शक्ति है कि इससे असंभव भी संभव हो सकता है। महाराज जी कहते हैं, कि तप के माध्यम से इंसान न केवल सांसारिक वस्तुएं, बल्कि ब्रह्मा का पद भी पा सकता है।
महाराज जी ने इन नियमों को अपनाने के दौरान कुछ चेतावनियां भी बताई हैं। उन्होंने कहा, अगर आप चाहते हैं कि आपके नाम जप और तप का उचित फल मिले, तो इन बुराइयों से पूरी तरह दूर रहें:
महाराज जी भरोसा दिलाते हुए कहते हैं, जिस दिन आपके नाम जप से पुराने पाप नष्ट हो जाएंगे, उसी दिन से आपके जीवन में खुशियों और आनंद की बौछार होने लगेगी। जिस सांसारिक सुख के पीछे आप भाग रहे हैं, वो तो भक्ति करने से आपको अपने आप मिल जाएगा। इसलिए खूब भजन करें और अपने कर्मों से नया भाग्य लिखें। महाराज जी के अनुसार वर्तमान कर्म और समय आपके हाथ में है। इस समय में सही काम कर पूर्व जन्म के कर्म-बंधनों (प्रारब्ध) को काटा जा सकता है। प्रारब्ध को काटने का सही तरीका नाम जप, भक्ति, सुमिरन और सही कर्म ही हैं।
Published on:
23 Jan 2026 05:41 pm

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