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ये हैं आधुनिक श्रवण कुमार, 20 साल से मां को कांवड में बिठा करा रहा है चारधाम यात्रा

मध्य प्रदेश में जबलपुर का एक व्यक्ति कैलाश गिरी पिछले 20 सालों से अपनी दृष्टिहीन मां को कांवड में बैठाकर चार धाम की यात्रा करा रहा है

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Sunil Sharma

Apr 20, 2016

modern Shravankumar kailash giri

modern Shravankumar kailash giri

आज के दौर में जब सन्तान द्वारा माता-पिता की उपेक्षा की घटनाएं आम हो चुकी हैं, मध्य प्रदेश में जबलपुर का एक व्यक्ति पिछले 20 सालों से अपनी दृष्टिहीन मां को कांवड में बैठाकर चार धाम की यात्रा करा रहा है। जबलपुर के कैलाश गिरी देश की युवा पीढी के लिये वह जीवंत मिसाल है जिसे वह स्कूल की किताबों में सतयुग के श्रवण कुमार की कहानी के रूप में पढते थे।

20 वर्ष दो माह पहले शुरु हुई थी यात्रा
मां की चार धाम की यात्रा की इच्छा को पूरा करने की खातिर कैलाश ने अविवाहित रहने का निर्णय लिया। कांवड़ पर अपनी दृष्टिहीन मां को बैठाकर चार धाम की यात्रा को निकले कैलाश 20 सालों से लगातार पैदल चल रहे हैं। आज से 20 साल दो महीने पहले शुरु की गई यात्रा के बाद कैलाश गिरी ने अब यूपी में मथुरा-वृंदावन की यात्रा कर रहे हैं। कांवड़ के एक पलड़े में मां और दूसरे पलड़े में सामान रखकर यात्रा करने वाले कैलाश के मातृप्रेम को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह गया और देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।



21 वर्ष पहले हुआ पिता का देहांत

मध्यप्रदेश के जबलपुर में रहने वाले कैलाश गिरी ने बताया कि वे मां को जगत के पालनहार कृष्ण कन्हैया की पावन नगरी मथुरा, वृद्धांवन के दर्शन कराने के लिए ले जा रहे हैं। उनके पिता सिकोड़ी लाल का 21 वर्ष पूर्व देहांत हो चुका है। ²ष्टिहीन मां ने चार धाम की यात्रा की इच्छा व्यक्त की थी जिसे पूरा करने के लिए उसने कांवड़ तैयार की।


चारों धाम की यात्रा हुई पूरी, अब हर तीर्थस्थल पर जाना लक्ष्य

कैलाश ने बताया कि दुनिया में जब आंख खोली, तो मां की गोद मिली। माता-पिता पहले भगवान हैं, भगवान की इच्छा पूरी करना ही धर्म है। इसी धर्म को निभाने के लिए निकला हूं। बीस वर्ष पहले कैलाश गिरी की उम्र 30 वर्ष थी। आज वे 50 वर्ष के हो चुके हैं, लेकिन हौसला आज भी जवान है और चारों धामों की पूरी हो चुकी है यात्रा अन्तिम पड़ाव पर है और अब मथुरा वृंदावन जा रहे हैं। इसके बाद मां जहां जाने की इच्छा जाहिर करेंगी, उस ओर रुख कर लेंगे। उन्होंने बताया कि जीवन का लक्ष्य अपनी मां को प्रभु के हर तीर्थ, हर धाम के दर्शन कराना ही रह गया है।



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