
modern Shravankumar kailash giri
आज के दौर में जब सन्तान द्वारा माता-पिता की उपेक्षा की घटनाएं आम हो चुकी हैं, मध्य प्रदेश में जबलपुर का एक व्यक्ति पिछले 20 सालों से अपनी दृष्टिहीन मां को कांवड में बैठाकर चार धाम की यात्रा करा रहा है। जबलपुर के कैलाश गिरी देश की युवा पीढी के लिये वह जीवंत मिसाल है जिसे वह स्कूल की किताबों में सतयुग के श्रवण कुमार की कहानी के रूप में पढते थे।
20 वर्ष दो माह पहले शुरु हुई थी यात्रा
मां की चार धाम की यात्रा की इच्छा को पूरा करने की खातिर कैलाश ने अविवाहित रहने का निर्णय लिया। कांवड़ पर अपनी दृष्टिहीन मां को बैठाकर चार धाम की यात्रा को निकले कैलाश 20 सालों से लगातार पैदल चल रहे हैं। आज से 20 साल दो महीने पहले शुरु की गई यात्रा के बाद कैलाश गिरी ने अब यूपी में मथुरा-वृंदावन की यात्रा कर रहे हैं। कांवड़ के एक पलड़े में मां और दूसरे पलड़े में सामान रखकर यात्रा करने वाले कैलाश के मातृप्रेम को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह गया और देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी।

Published on:
20 Apr 2016 09:18 pm
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