नीम करोली बाबा की लीला (Neem Karoli Baba ki Leela) अनोखी हैं। कहते हैं भगवान भक्त के मन की बात जान लेते हैं और भक्त के साथ लीलाएं करते हैं। नीब करोली बाबा के भक्त भी उनके ऐसे ही चमत्कारों के बारे में बताते हैं जिसे पढ़कर आप हैरान हो जाएंगे...आइये आपको बाबा नीम करोली की ऐसी ही एक कहानी बताते हैं, जिसमें भक्त के लिए बाबा को एक महिला की डांट तक खानी पड़ी...
बाबा नीम करोली की एक भक्त थीं नैनीताल की रहने वाली श्रीमती विधा शाह। बाबा के भक्तों के अनुसार एक दिन विधा शाह मन में सोच रहीं थीं कि महाराजजी आप सब के घर आते हैं, मेरे घर भी कभी आओ.. मैं तो संकोच के कारण कह नहीं पाती। शाह के अनुसार तभी बाबा बोले, 'हम तेरे घर आएंगे, तू मंदिर में हवन करा।'
इससे खुश शाह ने मंदिर के पुजारी से हवन का अनुष्ठान कराया, जिस दिन पूर्णाहुति थी, उस दिन वे प्रसाद लेकर घर आ रहीं थीं तो शाह ने देखा कि रास्ते भर एक दुबला पतला साधु उनके पीछे-पीछे चला आ रहा है। साधु के काफी देर से उनके पीछे-पीछे आने के कारण शाह परेशान हो रहीं थीं।
विधा शाह का घर बाजार में था, और घर आने का रास्ता एक पंजाबी परिवार के घर से होकर जाता था। बाबा को नहीं पहचान रही विधा शाह जल्दी-जल्दी घर की संकरी सीढ़ियां चढ़ने लगीं और घर के भीतर चली गईं। इधर, साधु भी पीछे-पीछे जाता रहा, तभी पंजाबी परिवार की महिला घर से बाहर निकली और साधु को डांटा और वहां से भगा दिया। महिला समझ नहीं पाई कि साधु शाह के पीछे-पीछे क्यों जा रहा है।
इस घटना के कुछ समय बाद जब विधा शाह बाबा के पास बैठीं थीं तो उनके मन में खयाल आया कि बाबा ने घर आने की बात कही थी, इनके कहे अनुसार यज्ञ भी कराया पर बाबा नहीं आए। इस पर बाबा नीम करोली बोल उठे, 'हम तो वहां गए थे, पर तेरे यहां की पंजाबिन ने हमें भगा दिया।' इस तरह विधा शाह बाबा को पहचान ही न पाईं। इस बात की विधा को अपने पर बहुत ग्लानि हुई। बाद में उन्होंने लोगों को बताया कि बाबा तो किसी भी रूप में आपको मिल सकते है, बस आप पहचान लीजिए।
हर संकट में बाबा पहुंच जाते थे पार लगाने
कुछ भक्त सन 1968 का बाबा का चमत्कार बताते हैं । भक्तों के अनुसार बाबा के एक भक्त की बेटी प्रसव काल मे थी और वह कष्ट से बेहाल थी। भक्त के घरवाले परेशान थे। डॉक्टरों ने भी लाचारी व्यक्त कर दी थी, डॉक्टर किसी भी तरह का ढांढ़स घर वालों को दिला नहीं पा रहे थे कि ऑपरेशन के बाद प्रसूता की जान बच जाएगी या नहीं। इसी समय अचानक वहां महाराजजी आ गए और सीधे उनकी बेटी के कमरे में जाकर बैठ गए।
यहां बाबा नीम करोली ने आशीर्वाद के रूप में प्रसव पीड़िता को एक पुष्प दिया और ढांढस बंधाया और कुछ देर बाद चले गए। इसके बाद बेटी का प्रसव सहजता से हो गया, उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इस घटना ने वहां मौजूद सभी भक्तों के चेहरों पर मुस्कान ला दी।