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मृत्यु के पहले ही लिख दी जाती है अगले जन्म की स्क्रिप्ट, इन 3 संकेतों से पहचानें अगले जन्म में आप क्या बनेंगे

Next Birth Prediction: अगले जन्म में आप क्या बनने वाले हैं, इसका पता कुछ संकेतों से लगाया जा सकता है। गरूड़ पुराण से समझिए, आपके कर्मों के अनुसार आपका अगला जन्म क्या हो सकता है।

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 26, 2026

Garud Puran in hindi

Next Birth Secret: इन संकेतों से अगले जन्म का पता लगाएं। (PC: AI)

Agla Janm Kaise Pata Kare: सनातन धर्म के महापुराणों में गरुड़ पुराण का विशेष महत्व है। इसमें भगवान विष्णु ने अपने वाहन गरुड़ को जीवन, मृत्यु और उसके बाद की यात्रा के गहरे रहस्यों के बारे में समझाते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपकी मृत्यु से पहले ही यह तय हो जाता है कि आपका अगला जन्म कहां और किस रूप में होगा? गरुड़ पुराण के अनुसार, यह पूरी तरह से व्यक्ति के कर्मों और मृत्यु के समय उसके मन की स्थिति पर निर्भर करता है। साथ ही कुछ संकेतों पर गौर कर हम ये पता कर सकते हैं कि अगला जन्म हमें किस योनी में मिलेगा।

कर्म तय करते हैं 84 लाख योनियों का सफर

गरुड़ पुराण में कुल 84 लाख योनियों का वर्णन आता है। इनमें से मनुष्य योनि को सबसे श्रेष्ठ और दुर्लभ बताया गया है। व्यक्ति जीवन भर जो कर्म करता है, उसका लेखा-जोखा अगले जन्म की योनी का आधार बनता है। जो लोग पुण्य कर्म और भक्ति में लीन रहते हैं, उन्हें उत्तम लोक या फिर से श्रेष्ठ मानव कुल में जन्म मिलता है।

किस कर्म से मिलता है कौन सा जन्म?

  • ईश्वर का अपमान: जो लोग धर्म का अपमान करते हैं, ईश्वर का मजाक उड़ाते हैं या नास्तिकता फैलाते हैं, उन्हें अगले जन्म में कुत्ते की योनि प्राप्त होती है।
  • मित्र से विश्वासघात: यदि कोई अपने मित्र को धोखा देता है, तो उसे गिद्ध के रूप में जन्म लेना पड़ता है।
  • छल-कपट और ठगी: दूसरों को धोखे से ठगने वाले या बेईमानी करने वाले व्यक्ति को अगले जन्म में उल्लू बनना पड़ता है।

अंतिम समय में क्या करें?

शास्त्रों के अनुसार, मृत्यु के समय मनुष्य के मन में जो विचार चल रहे होते हैं, वे भी अगले जन्म को प्रभावित करते हैं। इसलिए धर्म में अंत समय में ईश्वर के नाम स्मरण पर विशेष जोर दिया गया है। गरुड़ पुराण डराता नहीं है, बल्कि हमें सही मार्ग पर चलने और मोक्ष प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। गरुड़ पुराण के मुताबिक, अंतिम समय में भक्ति, भगवान का नाम जप और सद्कर्म ही मनुष्य को करने चाहिए।

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