शंकरपुरी ने बताया, "मैं नैमिषारण्य का हूं। कहा जाता है, वहां 88 हजार ऋषि रहते हैं। मेरा जन्म भी वहीं हुआ, मेरा आश्रम भी वहीं है। उसी जगह ने मुझे खड़े रहने की प्रेरणा दी। मैं छह साल की उम्र से संत बन गया था।" जब उनसे पूछा कि क्या वो कभी बैठते या लेटते हैं, तो सीधा जवाब आया, "मैं सात साल से खड़ा हूँ।" आराम कैसे करते हैं? तो वो बताते हैं कि सिर टिकाने के लिए लकड़ी का सहारा लेते हैं। खड़े-खड़े ही नींद आ जाती है।