
Holi 2026 Chandra Grahan : होली 2026 पर चंद्र ग्रहण (फोटो सोर्स: Gemini AI)
Holi 2026 Chandra Grahan: आज 2 मार्च 2026 है, और पूरे देश में रंगों के त्योहार होली की तैयारियां जोरों पर हैं। लेकिन इस बार की होली आम नहीं है। इस साल पूर्णिमा के साथ-साथ चंद्र ग्रहण का योग भी बन रहा है। जहां कुछ लोग इसे लेकर आशंकित हैं, वहीं ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि यह डराने वाली घटना नहीं, बल्कि खुद को आध्यात्मिक रूप से रिसेट करने का एक शानदार मौका है।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य महेश कासव जी के अनुसार, ग्रहण को लेकर हमारे मन में जो भय है, वह वैज्ञानिक कम और सामाजिक अफवाहों का हिस्सा ज्यादा रहा है। आइए जानते हैं 2026 की इस खास होली और ग्रहण से जुड़ी हर बारीक बात, जो आपके जीवन में सकारात्मकता भर देगी।
इस वर्ष ग्रहण का मोक्ष काल (समाप्ति) शाम 6:47 बजे हो रहा है। पंचांग के अनुसार, चंद्रमा का उदय शाम 5:27 से 6:44 के बीच होगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण सूर्य के पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है, जिससे इसका सबसे ज्यादा प्रभाव सिंह, मेष, मिथुन और वृश्चिक राशियों पर देखने को मिलेगा। इन राशि वालों को थोड़ा संभलकर रहने और मानसिक शांति पर ध्यान देने की जरूरत है।
अक्सर कहा जाता है कि ग्रहण में बाहर न निकलें या खाना न खाएं। महेश जी इसके पीछे के वैज्ञानिक पहलुओं को बड़ी खूबसूरती से समझाते हैं:
बैक्टीरिया का बढ़ना: सूर्य या चंद्र की रोशनी कम होने पर कुछ हानिकारक बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते थे। पुराने समय में फ्रिज नहीं थे, इसलिए खाना अशुद्ध हो जाता था। आज के युग में स्वच्छता के साधन मौजूद हैं, इसलिए डरने की बात नहीं।
सुरक्षा का सवाल: पुराने समय में बिजली नहीं होती थी, अंधेरे में गर्भवती महिलाओं या बुजुर्गों को चोट न लगे, इसलिए उन्हें घर में रहने की सलाह दी जाती थी।
ज्वार-भाटा: पूर्णिमा और ग्रहण के समय समुद्र में लहरें उग्र होती हैं, इसलिए तटीय इलाकों के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए यह नियम बनाए गए थे।
ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। ग्रहण के दौरान मन विचलित हो सकता है, लेकिन यही वह समय है जब आपकी प्रार्थना सबसे शक्तिशाली होती है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण काल में किया गया एक जप, सामान्य दिनों के सवा लाख जप के बराबर पुण्य देता है।
विशेष टिप: यदि आपको कोई कठिन मंत्र नहीं आता, तो बस शांत बैठकर अपनी सांसों पर ध्यान दें। यह भी एक बड़ी साधना है।
ग्रहण के दौरान और उसके बाद मानसिक शांति के लिए आप इन सरल मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। विद्वानों के अनुसार:
3 मार्च 2026: सुबह 6:20 से सूतक लग जाएगा।
होलिका दहन: 3 मार्च की शाम 6:47 (ग्रहण समाप्ति) के बाद कभी भी किया जा सकता है। कुछ स्थानों पर विद्वान 2 मार्च की रात को भी शुभ मान रहे हैं।
रंगों की होली: 4 मार्च को पूरे हर्षोल्लास के साथ खेली जाएगी।
परंपरा का सम्मान: कैसे लगाएं अपनों को गुलाल?
होली पर बड़ों का आशीर्वाद लेना हमारी संस्कृति है। महेश जी बताते हैं कि गुलाल लगाने का भी एक तरीका है:
बुजुर्गों के लिए: उनके माथे पर अंगूठे से तिलक लगाएं (यह विजय का प्रतीक है) या उनके चरणों में गुलाल अर्पित करें।
महिलाओं के लिए: अपनी अनामिका (Ring finger) से उनकी हथेली पर रंग लगाएं।
होली अहंकार को जलाने का त्योहार है। जैसे प्रह्लाद अग्नि से सुरक्षित निकल आए थे, वैसे ही आप भी इस ग्रहण काल में अपने भीतर के डर और अहंकार की आहुति दें। सुरक्षित होली खेलें, रसायनों की जगह फूलों का उपयोग करें और हुड़दंग से बचें।
Published on:
02 Mar 2026 10:36 am
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