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कुंडली में ग्रहों की दशा देखकर ऐसे करें प्रॉपर्टी में निवेश

property investment : जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव से जमीन-जायदाद तथा भू-सम्पत्ति के बारे में विचार किया जाता है। यदि चतुर्थ भाव तथा उसका स्वामी ग्रह...

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Deovrat Singh

Nov 06, 2017

property investment

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property investment : जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव से जमीन-जायदाद तथा भू-सम्पत्ति के बारे में विचार किया जाता है। यदि चतुर्थ भाव तथा उसका स्वामी ग्रह शुुभ राशि में, शुभ ग्रह या अपने स्वामी से युत या दृष्ट हो, किसी पाप ग्रह से युत या दृष्ट न हो तो जमीन संबंधी व्यापार से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। भूमि का कारक ग्रह मंगल है। अत: कुंडली में चतुर्थ भाव, चतुर्थेश तथा मंगल की शुभ स्थिति से भूमि संबंधी व्यापार से फायदा होगा।

property investment : प्रॉपर्टी में मंदी को देखकर लोग निवेश कर रहे हैं। लेकिन क्या यह समय उनके अनुकूल है। अगर ग्रहों की चाल अपनी राशि के अनुसार सही नहीं है तो जरा सोचने की जरुरत है। ऐसे में गृह दिशा किसी पंडित या जानकार से दिखाकर ही प्रॉपर्टी में निवेश करें। भूमि के व्यापार में जमीन का क्रय-विक्रय करना, प्रॉपर्टी में निवेश कर लाभ में बेचना, बिचौलिया की तरह काम करना तथा कॉलोनाइजर के रूप में स्कीम काटकर बेचना इत्यादि शामिल होता है।


property investment : भूमि से संबंधित ग्रहों का शुभ संयोग कुंडली के धन (द्वितीय) तथा आय (एकादश) भाव से भी होना आवश्यक है।
चतुर्थ भाव का स्वामी एवं मंगल उच्च, स्वग्रही अथवा मूल त्रिकोण का होकर शुभ युति में हो तथा धनेश, लाभेश से संबंध बनाए तो प्रॉपर्टी के कारोबार से उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार चतुर्थ भाव का स्वामी धनेश, लाभेश, लग्न अथवा दशम भाव के स्वामी से राशि परिवर्तन करे तो, उस व्यक्ति को भूमि के क्रय-विक्रय से धन लाभ होता है।

प्रॉपर्टी में मंदी को देखकर लोग निवेश कर रहे हैं। लेकिन क्या यह समय उनके अनुकूल है। अगर ग्रहों की चाल अपनी राशि के अनुसार सही नहीं है तो जरा सोचने की जरुरत है। ऐसे में गृह दिशा किसी पंडित या जानकार से दिखाकर ही प्रॉपर्टी में निवेश करें।