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डिप्रेशन, एंजायटी, ओवरथिंकिंग का शास्त्रों में छुपा है आसान सॉल्यूशन, कोई नहीं कर पाएगा हर्ट!

Depression Anxiety Overthinking Solution in Hindi: यदि आप भी डिप्रेशन, ओवरथिंकिंग, एंजायटी और छोटी-छो़टी बातों पर हर्ट होने की समस्या से जुझ रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। इसमें हमने शास्त्रों से इन सभी प्रॉब्लम्स के आसान सॉल्यूशन्स बताए हैं।

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 22, 2026

Overthinking and hurting problem solution

Overthinking Solution in hindi: सास्त्रों के ये सूत्र अपना लिए तो कोई नहीं कर पाएगा हर्ट! (PC: AI)

Depression, Anxiety, Overthinking Solution in Hindi: हम से ज्यादातर लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें छोटी-छोटी बातों का बहुत बुरा लग जाता है। वे उसी बात को लंबे समय तक पकड़े रहते हैं और ऑवरथिकिंग कर खुदको तकलीफ देते हैं। यदि आप भी इनमें से एक हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। यहां हम आपको ऐसे सूत्र बताने जा रहे हैं, जिनको यदि जीवन में उतार लिया जाए तो चिंताएं और ऑवरथिंकिंग आपके इर्द-गिर्द भी नहीं भटकेंगी। खुशियां और प्रसन्न रहना आपके जीवन का हिस्सा बन जाएगा।

अपेक्षा रखना आज से ही छोड़ें

यदि हमारे जीवन के दुखों पर गौर करें, तो हम पाएंगे कि सभी की जड़ कहीं न कहीं अपेक्षाएं ही हैं। किसी अन्य से जब हम कोई उम्मीद रखते हैं, तो इसका मतलब यह होता है कि हमारे जीवन का कंट्रोल उनके हाथों में है। हमारी खुशियां उन पर निर्भर है। हमेशा खुश रहने की चाह रखने वाला व्यक्ति किसी से कोई चाह या मनमुताबिक व्यवहार की उम्मीद नहीं रखता है। जिस समय वह दूसरों की किसी भी प्रतिक्रिया को उनके व्यवहार का हिस्सा मानकर कोई एक्सपेक्टेशन नहीं रखता, तभी से उसकी खुशियों की चीबी खुद के हाथ में आ जाती है।

दूसरों के विचार आपकी हकीकत नहीं

जब कोई आपके बारे में ऐसी बात कहें या राय बनाए, जो आपको हर्ट कर रही हो..तब यह सोचें कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं। जजमेंट उनके व्यवहार का हिस्सा है और उनका मानना है..वह आपके जीवन की हकीकत नहीं। यह सोचना आपको तसल्ली देगा।
अंग्रेजी का एक कोट हमेशा याद रखें…

Other Person's Opinion is not My life's Reality.
अर्थः दूसरों के विचार, मेरे जीवन की हकीकत नहीं है।

खुदको स्वीकार करें

आप जैसे हैं, अच्छे हैं। इस बात को हमेशा ध्यान रखिए। खुद को अपनी सारी कमियों के साथ स्वीकार करिए। उनको सुधारने की दिशा में काम करिए। खुद से प्यार करिए। ओशो कहते हैं, " तुम जैसे हो, वैसे ही पर्याप्त हो, परफेक्ट हो। तु्म्हें किसी और चीज या वस्तु की कोई जरूरत नहीं है। खुदके भीतर का संगीत सुनो। खुदके साथ, नाचो, गाओ, प्रेम करो, मस्त रहो। जब तुम खुदको जैसे हो वैसे स्वीकार करते हो, तब परमात्मा के निकट होते हो, उसे महसूस करते हो।"

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार

भगवान कृष्ण गीता में कहते हैं, "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन"। इसका सरल अर्थ है कि हमारा अधिकार केवल अपने कर्म पर है, उसके फल यानी ती दूसरों की प्रतिक्रियाओं पर नहीं। जब हम फल की चिंता छोड़ देते हैं, तो हर्ट और दुखी होने का कारण अपने आप खत्म हो जाता है।

संत कबीर का दृष्टिकोण

संत कबीर दास जी कहते हैं, "निंदक नियरे राखिये, आंगण कुटी छवाय"। वे समझाते हैं कि जो हमारी आलोचना या बुराई करते हैं, वे बिना साबुन और पानी के हमारे स्वभाव (Nature/Behaviour) को साफ कर देते हैं। इसलिए दूसरों की बातों से दुखी होने के बजाय, उन्हें एक अवसर की तरह देखना चाहिए।

उपनिषद का विचार

शास्त्रों में "अहं ब्रह्मास्मि" का उद्घोष है, जिसका अर्थ है 'मैं ही ब्रह्म हूं'। यह हमें सिखाता है कि पूर्णता हमारे भीतर ही है। जब हम खुद को दिव्य और पूर्ण मान लेते हैं, तो बाहर की छोटी बातें हमें कष्ट नहीं दे पातीं। आत्म-स्वीकार्यता ही दूसरों की गलत बातों को नजरअंदाज (Ignore) करने का उपाय है।

शास्त्रों के अनुसार, मानसिक क्लेश और दिमाग की उथलपुथल का मुख्य कारण अविद्या और अनासक्ति का अभाव है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं, डिप्रेशन और चिंता का जन्म, फल की चिंता के साथ ही लोगों और चीजों से अत्यधिक मोह रखने से होता है।

डिप्रेशन, एंजायटी और ओवरथिंकिंग का समाधान क्या है? | Depression, Anxiety, Overthinking Solution

1. समत्व योग: गीता का सूत्र है, "सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते"। अर्थात् सफलता-विफलता और लाभ-हानि में समान रहना ही योग है। जब आप परिणाम की चिंता छोड़ वर्तमान कर्तव्य (स्वधर्म) पर ध्यान देते हैं, तो ओवरथिंकिंग अपने आप समाप्त हो जाती है।
2. साक्षी भाव: उपनिषद सिखाते हैं कि आप 'मन' नहीं, बल्कि 'आत्मा' हैं। जब आप विचारों को अपना न मानकर केवल एक दृष्टा (साक्षी/Seer ) की तरह देखते हैं, तो कोई भी शब्द आपको हर्ट नहीं कर पाता।
3. प्राणायाम: महर्षि पतंजलि के अनुसार, "चित्त वृत्ति निरोधः" ही शांति है। गहरी श्वास और ध्यान, मन की चंचलता यानी की एंजायटी को शांत कर आत्मिक आनंद देता है।

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