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Ganesh Pratima Visarjan: इस मुहूर्त में विदा होंगे गणपति, घर पर ऐसे करें पूजा और विसर्जन

ganpati pratima visarjan भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी के दिन विराजे गणपति के विदा होने की घड़ी नजदीक आ गई है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी के दिन 28 सितंबर को भक्त गणेशजी को विदा करेंगे, साथ ही गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस जल्दी आना.. गीत से उन्हें न्योता भी देंगे। इसी के साथ दस दिन तक चलने वाला गणेश उत्सव समाप्त हो जाएगा तो आइये जानते हैं गणेश प्रतिमा विसर्जन का मुहूर्त (ganesh idol immersion), अनंत चतुर्दशी महत्व और पूजा विधि आदि..

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Pravin Pandey

Sep 27, 2023

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अनंत चतुर्दशी को 28 सितंबर को गणपति प्रतिमा विसर्जन होगा, इसी के साथ दस दिवसीय गणेश उत्सव संपन्न हो जाएगा.

कब है अनंत चतुर्दशी
पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 27 सितंबर 2023 को रात 10.18 बजे हो रही है और यह तिथि 28 सितंबर को शाम 6.49 बजे तक है। नियम के अनुसार उदयातिथि में अनंत चतुर्दशी 28 सितंबर गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन गणपति के साथ भगवान शंकर, माता पार्वती, भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के साथ देव गुरु बृहस्पति की पूजा की जाएगी। इसके बाद बाजे गाजे के साथ भक्त गणेशजी को विदा करेंगे और नदी, तालाब या पारंपरिक जगह पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन करेंगे, कुछ लोग घर पर ही गणेशजी की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। गुरुवार को गणेश विसर्जन (प्रतिमा) का शुभ मुहूर्त सुबह 6.11 बजे से 7.41 बजे तक और शाम को 4.41 बजे से रात 9.11 बजे तक है।

गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः मुहूर्त (शुभ): सुबह 06:11 बजे से 07:41 बजे तक
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत): सुबह 10:41 बजे से 03:11 बजे तक
अपराह्न मुहूर्त (शुभ): शाम 04:41 बजे से 06:11 बजे तक


सायंकालीन मुहूर्त (अमृत, चर): शाम 06:11 बजे से रात 09:11 बजे तक
रात्रि मुहूर्त (लाभ): 29 सितंबर को देर रात 12:11 बजे से 01:41 बजे तक

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अनंत चतुर्दशी के दिन ऐसे करें विसर्जन
गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी तिथि सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की भी पूजा की जाती है। इसलिए भगवान विष्णु के भक्त इस दिन उपवास रखते हैं। भगवान की पूजा के समय हाथ में धागा बांधते हैं। ऐसी मान्यता है कि यह धागा भक्तों की हर संकट में रक्षा करता है। वहीं इस दिन भगवान गणेश की प्रतिमा को नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित किया जाएगा।


गणेश प्रतिमा विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा और आरती की जाती है, फूल चढ़ाए जाते हैं और प्रसाद, नारियल का भोग लगाया जाता है। इसके बाद पारंपरिक तौर पर ढोल-नगाड़ों के साथ धूमधाम से चल-समारोह के साथ गणेश प्रतिमा को नदी या तालाब तक लाया जाता है। हजारों की संख्या में भक्त गणेश भगवान के नाम के जयकारों के साथ, गणपति बप्पा मोरया और गणेश महाराज की जय के नारे लगाते हुए चल-समारोह में उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।

कुछ लोग घरों में ही करते हैं विसर्जन
ऐसे लोग जो घर में ही छोटी प्रतिमा रखकर गणेशोत्सव मनाते हैं, वे या तो मोहल्ले की बड़ी प्रतिमाओं की यात्रा में शामिल हो जाते हैं या घर पर नियम से पूजा करने के बाद साफ बर्तन में मूर्ति रख देते हैं, उसके घुलने के बाद पानी और मिट्टी को गमले में किसी पौधे की जड़ में डाल देते हैं।

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ऐसे करें गणेश प्रतिमा विसर्जन से पहले पूजा
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेशजी के साथ ही देवी दुर्गा, शिवजी, भगवान विष्णु और गुरु ग्रह की विशेष पूजा करनी चाहिए। गुरुवार को अनंत चतुर्दशी पढ़ने से इसका महत्व बढ़ गया है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ जरूरतमंदों को दान-पुण्य विशेष लाभदायक है। वाराणसी के पुरोहित पं. शिवम से जानें कैसे करें अनंत चतुर्दशी की पूजा..

1. गणेशजी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं और उनकी पूजा करके दूर्वा की 21 गांठ चढ़ाएं।
2. भगवान के सामने बैठकर 108 बार मंत्र जाप करें।
3. गणेश जी के खास मंत्र ऊँ मोदाय नम:, ऊँ प्रमोदाय नम:, ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ दुर्मुखाय नम:, ऊँ अविध्यनाय नम:, ऊँ विघ्नकरत्ते नम: आदि का जाप करना बेहद फलदायी होता है।
4. इसके बाद देवी चंडी की पूजा करना चाहिए, क्योंकि कलियुग में गणेशजी के साथ माता चंडी भी शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामना पूरी करने वाली देवी हैं। इसके लिए जल, कुमकुम, हार, फूल, फल आदि अर्पित करने के बाद मां दुर्गा की भी पूजा करनी चाहिए और ऊँ ऐं क्लीं चामुंडायै विच्चे मंत्र का जाप करना चाहिए।


5. इसके अलावा अनंद चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा महालक्ष्मी के साथ करें और सभी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का पंचामृत, दूध और जल से अभिषेक करें। उन्हें सुंदर वस्त्र अर्पित करें।
6. शिवजी की पूजा में तांबे या चांदी के लोटे से जल चढ़ाएं, बेल पत्र, धतूरा और फूल आदि चढ़ाएं।
7. देवताओं का चंदन से तिलक करें और देवी को कुमकुम चढ़ाएं। माता का हार-फूल से श्रृंगार करें।
8. सभी को भोग लगाएं, विष्णुजी के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर हो।


9. धूप-दीप जलाएं और आरती करें, पूजा के बाद क्षमा मांगें, प्रसाद बांटें और खुद भी लें।
10. गुरुवार और अनंत चतुर्दशी के योग में गुरु ग्रह यानी देव गुरु बृहस्पति की पूजा भी करनी चाहिए। इस दिन बृहस्पति की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है, इसलिए शिवलिंग पर चंदन का लेप करें। पीले फूल चढ़ाएं, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और जरूरतमंद लोगों को चने की दाल का दान करें।
11. इसके बाद दान दक्षिणा दें, जरूरतमंदों को भोजन कराएं।