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Sheetala Ashtami 2026: 11 मार्च को है शीतला अष्टमी, जानें इस दिन क्या करें और क्या नहीं

Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी की बसौड़ा (बासौड़ा) परंपरा है। इस दिन के लिए सप्तमी की रात को ही भोजन पकाकर रख लिया जाता है और अष्टमी के दिन वही बासी भोजन खाया जाता है। इस पर्व से जुड़े कुछ खास नियम भी होते हैं, जिन्हें जानना और पालन करना बहुत जरूरी माना जाता है।

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भारत

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MEGHA ROY

Mar 06, 2026

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Sheetala Ashtami kya kare kya na kare|फोटो सोर्स: Freepik

Sheetala Ashtami 2026: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व होली के आठ दिन बाद मनाया जाता है और कई स्थानों पर इसे बासौड़ा भी कहा जाता है। इस दिन मां शीतला की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और रोगों से रक्षा की कामना की जाती है। साल 2026 में शीतला अष्टमी 11 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन कुछ खास नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है, इसलिए क्या करें और क्या नहीं, यह जानना महत्वपूर्ण है।

शीतला अष्टमी पर क्या करें

बासी भोजन का भोग लगाएं

अष्टमी के दिन सुबह नया भोजन बनाने की बजाय सप्तमी की रात को बने व्यंजनों का भोग माता को लगाया जाता है।

नीम के पत्तों का प्रयोग करें

माता शीतला को नीम अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दिन नहाने के पानी में नीम के पत्ते डालना और पूजा में नीम की टहनी रखना शुभ होता है।

घर की सफाई करें

पूजा से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें, क्योंकि माता शीतला को स्वच्छता प्रिय होती है।

ठंडा जल अर्पित करें

पूजा के समय माता को ठंडा जल अर्पित करें और बाद में उस जल की कुछ बूंदें घर में छिड़कना शुभ माना जाता है।

दान-पुण्य करें

इस दिन जरूरतमंदों को ठंडा भोजन और पानी दान करना पुण्यदायक माना जाता है।

शीतला अष्टमी पर क्या न करें

  • इस दिन घर में चूल्हा या आग न जलाएं।
  • ताजा या गर्म भोजन बनाने से बचें।
  • सिलाई-कढ़ाई जैसे सुई-धागे के काम न करें।
  • तामसिक भोजन और शराब से दूर रहें।
  • कई जगहों पर महिलाओं के लिए सिर और कपड़े धोने की भी मनाही होती है।

शीतला अष्टमी पर बासी भोजन खाने की परंपरा क्यों है

शीतला अष्टमी का पर्व गर्मी के मौसम की शुरुआत में आता है, जब मौसम बदलने से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गर्मी से त्वचा संबंधी रोग हो सकते हैं, इसलिए इस दिन ठंडी तासीर वाले और बासी भोजन का सेवन किया जाता है। माना जाता है कि इससे शरीर को शीतलता मिलती है और माता शीतला की कृपा से परिवार स्वस्थ रहता है।