
नई दिल्ली। भारत में एक से बढकर एक अद्भुत मंदिर है जिनका आर्कटेक्चर देखकर किसी के भी होश उड़ जाएं। इनमें से अधिकतर मंदिर 7 वीं सदी से 16 वी सदी के है। यहां बात हो रही है देवभूमि उत्तराखंड के एक मंदिर की। वैसे तो यहां और भी बहुत से चमत्कारी मंदिर हैं। लेकिन जिस मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं थोड़ा हट के है यहां चुडिय़ाला गांव में सिद्धपीठ चूड़ामणि देवी का एक चमत्कारी मंदिर स्थित है।
यहां के लोगों का मानना है कि यहां सभी मुरादें पूरी होती हैं लेकिन यहां की मान्यता के अनुसार यहां बस यहां पर चोरी करनी पड़ती है। यहां के बारे में प्रचलित कथा है कि माता सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किए जाने से नाराज माता सती ने यज्ञ में कूदकर यज्ञ को विध्वंस कर दिया था।
मान्यता अनुसार भगवान शिव जब माता सती के मृत शरीर को लेकर जा रहे थे, तब माता का चूड़ा इस घनघोर जंगल में गिर गया था, जिसके बाद यहां पर माता की पिंडी स्थापित होने के साथ ही भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। देवभूमि के इस मंदिर की कहानी इस प्रकार है।बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1805 में लंढौरा रियासत के राजा द्वारा किया गया था।ऐसा कहा जाता है कि राजा एक बार शिकार करने जंगल गए, तो वहां उन्हें माता की पिंडी के दर्शन हुए। राजा का कोई पुत्र नहीं था।राजा ने उसी समय माता से पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगा।
उनकी यह मुराद पूरी हो गई। मन्नत पूरी होने पर राजा ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। तभी से इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। इस मंदिर में लोग पुत्र प्राप्ति के लिए दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं। मान्यता यह है कि अगर आप पुत्र की चाह रखते हैं, तो ऐसे में आपको मंदिर में आकर माता के चरणों में रखा लोकड़ा चोरी करके अपने साथ ले जाएं। उसके बाद आपके घर में बेटा पैदा होता है। जब आपकी मान्यता पूरी हो जाए तो आपको दोबारा जाकर यहां हाजरी लगानी होती है।
Published on:
14 Feb 2018 11:58 am
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