
नई दिल्ली। हमारे हिंदू धर्म में कई देवी-देवताओं को पूजने की मान्यता है। हर एक चीज के लिए अलग-अलग देवी देवता है। जैसे धन की देवी लक्ष्मी, विद्या की देवी सरस्वती इत्यादि। वैसे ही ब्रह्मा जी को कहा जाता है इस ब्रह्मांड के निर्माता तो वहीं ब्रह्मा जी के ही पुत्र भगवान विश्वकर्मा को रचना क ा देवता माना जाता है। आजकल की भाषा या अंग्रेजी में कहा जाएं तो इन्हें भगवानों का इंजीनियर कहा जाता है। इसीलिए अधिकतर काम वाले स्थानों यानि की दफ्तर वगैरह में भगवान विश्वकर्मा का पूजा किया जाता है। वैसे तो इंजीनियर देश और विदेश में कई चीजों को बनाते है जो कि काबिले तारीफ है लेकिन क्या आपको पता है भगवानों के इंजीनियर ने हमारी इस दुनिया में किन-किन चीजों का निर्माण किया है। तो आइए देखते है...

सोने की लंका का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। मान्यता है कि पार्वती से विवाह के बाद शिव जी ने विश्वकर्मा से सोने की लंका का निर्माण करवाया था। इसके बनने के बाद उन्होंने रावण को सोने की लंका के गृह पूजन के लिए बुलाया था लेकिन बाद में रावण ने दक्षिणा स्वरूप सोने की लंका की मांग कर डाली। उसके बाद से इसे रावण की साने की लंका के नाम से जाना जाता है।

कहा जाता है कि शिव जी जिस रथ में सवार होते है उसका भी निर्माण विश्वकर्मा जी के द्वारा ही किया गया है। सोने की बनी इस रथ के बाई ओर चंद्रमा तो दाई ओर सूरज विराजित है।

भगवत गीता में ये कहा गया है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका नगरी का निर्माण विश्वकर्मा जी से ही करवाया था। इस नगरी की लंबाई और चौड़ाई 48 कोस थी।

कहा जाता है कि हस्तिनापूर का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था।

बिहार के ओरंगाबाद में स्थित पश्चिमाभिमुख सूर्य मंदिर का भी निर्माण विश्वकर्मा ने ही करवाया था। यह मंदिर आज भी अपनी कलात्मकता के लिए प्रसिद्ध है। ये मंदिर करीब एक लाख पचास हजार सत्रह साल पुराना है। इसके शिलालेख में ब्राह्मी लिपि में कई श्लोक लिखा गया है जिससे इस मंदिर के उम्र का पता चलता है।

भगवान कृष्ण की गोपियां एक तालाब के किनारे उनका इंतजार किया करती थी। उन्हें ऐसा करते देख कृष्णजी काफी खुश हुए और तभी गोपियां उनसे एक नये तालाब को बनवाने की मांग कर डाली। कृष्ण जी उनकी बात को नहीं टाल पाएं और उन्होंने विश्वकर्मा को कहा कि इस तालाब का निर्माण फिर से किया जाएं। तब से आज तक इस तालाब को गोपी तालाब के नाम से ही जाना जाता है।

छत्तीसगढ़ के राजिम में बना भगवान विष्णु का राजीव लोचन मंदिर का निर्माण भी विश्वकर्मा जी ने ही किया था। यह मंदिर कमल के पराग पर बना हुआ है। दरअसल कहा जाता है कि एकबार भगवान विष्णु ने विश्वकर्मा जी से कहा कि वो उनके मंदिर का निर्माण धरती पर उस जगह पर करें जहां से पांच कोसों की दूरी तक शव को जलाया न जाएं लेकिन विश्वकर्मा जी को धरती पर ऐसा कोई भी जगह नहीं मिला। उन्होंने भगवान विष्णु के समक्ष अपनी ये बात रखी तब विष्णु ने अपना कमल धरती पर गिराया और विश्वकर्मा जी से ये कहा कि जिस स्थान पर ये कमल गिरे मंदिर का निर्माण वहीं किया जाएं।